आईना तब से चिढ़ने लगा,
प्यार जब से तू करने लगा।
गली में कभी चौबारे खड़ा,
रास्ता मेरा तू तकने लगा
डर है मुझे तब लगने लगा
सरेआम जब तू मिलने लगा।
प्यार जब से….।
मुलाकातें हुईं अफसाना बना,
मैं दीवानी हुई तू दीवाना लगा
सब पराए हुए तू सगा है बना
प्यार परवान जब है चढ़ने लगा।
प्यार जब से….।
हर आहट पे अब चौंकने मैं लगी,
दिल जोरों से मेरा धड़कने लगा
तेरी यादें हैं मुझको जलाने लगी,
रह-रह के तू याद आने लगा।
प्यार जब से….।
#राजबाला ‘धैर्य’
परिचय : राजबाला ‘धैर्य’ पिता रामसिंह आजाद का निवास उत्तर प्रदेश के बरेली में है। 1976 में जन्म के बाद आपने एमए,बीएड सहित बीटीसी और नेट की शिक्षा हासिल की है। आपकी लेखन विधाओं में गीत,गजल,कहानी,मुक्तक आदि हैं। आप विशेष रुप से बाल साहित्य रचती हैं। प्रकाशित कृतियां -‘हे केदार ! सब बेजार, प्रकृति की गाथा’ आपकी हैं तो प्रधान सम्पादक के रुप में बाल पत्रिका से जुड़ी हुई हैं।आप शिक्षक के तौर पर बरेली की गंगानगर कालोनी (उ.प्र.) में कार्यरत हैं।
Mon Jun 12 , 2017
प्रेम प्यार की वो पुजारन अंखियों की वे नूर, ले आया था भर मांग उनकी ‘एक चुटकी सिन्दूर’। आने से महक उठा था देखो घर-आँगन, जीत लिया था उसने, सबका देखो मन, श्रृंगारित हो ललचाती मुझको, हंसमुख सुहागन, हम सबको नाज था उस पर देखो भरपूर, ले आया था भर […]