अनोखी विधा से पढ़ाते है चुटकियों में सीखा देते है 1 से 100 तक के पहाड़े खंडवा के दीपक निमाडे।

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हमारे देश में गणित को हम हमेशा कठिन विषय मानते हैं पर यह बात गलत है। गणित से सरल कोई विषय नहीं है। छोटी क्लास के बच्चों को पहाड़े कठिन पड़ते हैं। पर उनको सरल बनाया जा सकता है। गणित के ही शब्द में उसका अर्थ छुपा है, यह कहना है खंडवा के दीपक निमाडे का वह 1 से 100 तक के पहाड़े आसानी से चुटकियो में बिना याद किये सीखा देते है। साथ ही गणित के कठिन विधियों को भी जादुई विधि से हल करने की कला बच्चों को सीखा रहे है।इन्होंने बच्चों को कठिन लगने वाले पहाड़ो को जादुई तरीके से बिना याद किये लिखने की विधि इजात की है वह 1 से 100 तक के पहाड़े चुटकियो में जादुई विधि से हल कर देते है। इंटरनेट पर यूट्यूब पर वीडियो के माध्यम से भी यह कठिन से कठिन लगने वाले सवालों को हल करने की विधि बच्चों को सीखा रहे है।भूत की तरह डराने वाले गणित के सवाल अब बच्चों द्वारा चुटकी बजाकर हल किए जा रहे हैं। छात्र जोड़, घटाने, गुणा और भाग पलक झपकते ही कर रहे हैं। दीपक निमाडे ने बच्चों को संख्याओ को आसानी से जोड़ना,समतुल्य भिन्न बनाने का तरीका ,वर्ग ज्ञात करने की मजेदार विधि, दो अंको का वर्ग ज्ञात करने का आसान तरीका,छोटे बच्चो के लिए गुणा करने का आसान तरीका , 100 से छोटी संख्याओ का आसानी से गुणा करना, तीन अंको का आसान गुणा, पैसे को रुपयो मे बदलना अन्य सभी गणीतिय विधि सिखाया है। गणित सिखाने का नवाचार के अंतर्गत नया तरीका निकाला है।
गुरव समाज के हेमन्त मोराने ने बताया कि खंडवा की गुरव समाज के दुबे कॉलोनी निवासी 50 वर्षीय दीपक निमाडे जो पेशे से एक शिक्षक है वह शिक्षा में एमएससी गणित है। फिलहाल वह घर पर छोटे बच्चों को कोचिंग क्लासेस, के साथ सँगीत कार्य एवम छोटा सा व्यवसाय, भी करते है। इनके पास ऎसा तरीका है कि अनपढ़ व्यक्ति को भी एक महीने में पढ़ना लिखना और अंग्रेज़ी बोलना सीखा सकते है। वह 30 साल से कोचिंग पढ़ा रहे है। अंग्रेजी हाई स्कूल में प्रिंसिपल भी रह चुके है। इसी तरह अन्य और भी बहुत सारी विधि जो उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर सिखाई है। इससे बच्चे कक्षा में शिक्षण के दौरान आसानी से अंकों का गुणा लगा सकते हैं।
समाज अध्यक्ष भरत कुवादे ने बताया की दीपक निमाडे जी एक हसमुख और बहुमुखी प्रतिभा के धनी है सँगीत के क्षेत्र में भी इनमें प्रतिभा भरी हुई है, शिक्षा के क्षेत्र में समाज के इस शिक्षक के प्रयोग को सराहना मिल रही है। हम समाज के बच्चों को इनसे नई विधि से गणित सीखने के लिये प्रेरित भी कर रहे है। दीपक निमाडे बताते हैं कि इस नवाचार से जहां बच्चों को पहाड़े रटने की प्रवृत्ति से छुटकारा मिलेगा और गणितीय क्षमता का विकास भी होगा। कक्षा में बच्चों को गणित के सवाल तो दिया जाता है, लेकिन उसे हल करने और बच्चों को सिखाने के लिए कोई सरल उदाहरण नहीं है। इश्लिये यह पद्धति से में बच्चों को सिखाता हु। यूट्यूब पर किसी मित्र ने एक बार वीडियो बना कर पोस्ट कर दिया था तब से देश ही नही विदेशों से भी फोन आने लगे है। बच्चे अंकों का पहाड़ा याद नहीं कर पाते हैं। ऐसे नवाचारों से बच्चों में गणित सीखने की रुचि भी बढ़ेगी।पढ़ाने वाले शिक्षकों को सरल तरीका मिलेगा, जिसका अभी गणित के पुस्तक में अभाव है।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।