हिंदी के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका

sushila sharma
     वर्तमान समय में सोशल मीडिया हिंदी प्रचार प्रसार में अहम भूमिका अदा कर रहा है ।भारत में दूरदर्शन के अधिकतर चैनल हिंदी भाषा में ही प्रसारित किये जा रहे हैं, जिनमें समाचार, धारावाहिक, गायन, नृत्य प्रतियोगिताएँ, विभिन्न प्रकार के मनोरंजक खेल व अन्य सामाजिक कार्यक्रम यदि सबसे अधिक लोकप्रिय हैं तो वे हमारी मातृभाषा हिन्दी के कारण ही हैं ।देश के अलावा विदेशों में भी भारतीय मूल के लोग हिंदी में प्रसारित मीडिया कार्यक्रम देख-सुन कर आत्मीयता अनुभव करते हैं ।
        आज जन-जन के हाथ में मोबाइल चौबीस घंटे रहता है जिसके कारण सोशल मीडिया नेटवर्किंग में गजब की क्रांति आई है ।भारत की अस्सी प्रतिशत जनता  ऐसी है जो अपने मित्रों, स्वजनों से हिंदी में ही वार्तालाप करते नजर आते हैं ।कोई भी सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हिंदी भाषी ही होते हैं जो मीडिया द्वारा सीधे या रिकार्डेड प्रसारित करते हैं और उन कार्यक्रमों को करोड़ो देशवासी देखकर स्वयं को अपडेट रख पाते हैं।
         आज पूरे भारत में हिंदी को पाठ्यक्रम में शामिल करने के कारण देश का हर नागरिक  इसे पढ़ने, समझने की क्षमता रखता है और इसे अपनी प्रिय भाषा मानता है ।आज मीडिया द्वारा ही कृषि दर्शन, शिक्षा संबंधी जानकारी, ताजा समाचार, साक्षात्कार, कविता पाठ ,फिल्मी गीत, संगीत आदि प्रत्येक कार्यक्रम हिंदी में ही प्रसारित किये जा रहे हैं।
         आकाशवाणी भी हिंदी प्रसार का एक सशक्त माध्यम है जो लगभग अस्सी वर्षों से हिंदी के रोचक कार्यक्रम प्रसारित करता आ रहा है ।एफ. एम के मनोरंजक कार्यक्रम तो हिन्दी में ही होते हैं और हमारे हाथ के मोबाइल में युवा वर्ग को बेहद पसंद किये जाते हैं।आज हमारा हिन्दी साहित्य सृजन भी मीडिया के कारण ही उच्च शिखर पर अपना परचम फहरा रहा है ।इसलिए हम कह सकते हैं कि हिंदी के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।मीडिया ने  ही आज टीवी, मोबाइल, रेडियो आदि के माध्यम से हमारी भाषा हिन्दी को विश्व विख्यात करने में सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाई है और निभा रहा है ।
#श्रीमती सुशीला शर्मा 
सोडाला (जयपुर) 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।