वर्तमान समय में सोशल मीडिया हिंदी प्रचार प्रसार में अहम भूमिका अदा कर रहा है ।भारत में दूरदर्शन के अधिकतर चैनल हिंदी भाषा में ही प्रसारित किये जा रहे हैं, जिनमें समाचार, धारावाहिक, गायन, नृत्य प्रतियोगिताएँ, विभिन्न प्रकार के मनोरंजक खेल व अन्य सामाजिक कार्यक्रम यदि सबसे अधिक लोकप्रिय हैं तो वे हमारी मातृभाषा हिन्दी के कारण ही हैं ।देश के अलावा विदेशों में भी भारतीय मूल के लोग हिंदी में प्रसारित मीडिया कार्यक्रम देख-सुन कर आत्मीयता अनुभव करते हैं ।
आज जन-जन के हाथ में मोबाइल चौबीस घंटे रहता है जिसके कारण सोशल मीडिया नेटवर्किंग में गजब की क्रांति आई है ।भारत की अस्सी प्रतिशत जनता ऐसी है जो अपने मित्रों, स्वजनों से हिंदी में ही वार्तालाप करते नजर आते हैं ।कोई भी सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हिंदी भाषी ही होते हैं जो मीडिया द्वारा सीधे या रिकार्डेड प्रसारित करते हैं और उन कार्यक्रमों को करोड़ो देशवासी देखकर स्वयं को अपडेट रख पाते हैं।
आज पूरे भारत में हिंदी को पाठ्यक्रम में शामिल करने के कारण देश का हर नागरिक इसे पढ़ने, समझने की क्षमता रखता है और इसे अपनी प्रिय भाषा मानता है ।आज मीडिया द्वारा ही कृषि दर्शन, शिक्षा संबंधी जानकारी, ताजा समाचार, साक्षात्कार, कविता पाठ ,फिल्मी गीत, संगीत आदि प्रत्येक कार्यक्रम हिंदी में ही प्रसारित किये जा रहे हैं।
आकाशवाणी भी हिंदी प्रसार का एक सशक्त माध्यम है जो लगभग अस्सी वर्षों से हिंदी के रोचक कार्यक्रम प्रसारित करता आ रहा है ।एफ. एम के मनोरंजक कार्यक्रम तो हिन्दी में ही होते हैं और हमारे हाथ के मोबाइल में युवा वर्ग को बेहद पसंद किये जाते हैं।आज हमारा हिन्दी साहित्य सृजन भी मीडिया के कारण ही उच्च शिखर पर अपना परचम फहरा रहा है ।इसलिए हम कह सकते हैं कि हिंदी के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।मीडिया ने ही आज टीवी, मोबाइल, रेडियो आदि के माध्यम से हमारी भाषा हिन्दी को विश्व विख्यात करने में सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाई है और निभा रहा है ।
#श्रीमती सुशीला शर्मा
सोडाला (जयपुर)
Thu May 30 , 2019
प्रिय देशवासियों ! स्वाधीनता संग्राम के दौरान स्वराज, स्वदेशी और स्वभाषा पर ज़ोर दिया गया था। यह हमारा राष्ट्रीय मत था कि बिना स्वदेशी और स्वभाषा के स्वराज सार्थक सिद्ध नहीं होगा। हमारे तत्कालीन राष्ट्रीय नेताओं, विद्वानों, मनीषियों एवं महापुरुषों की यह दृढ़ अवधारणा थी कि कोई भी देश अपनी स्वाधीनता को […]