विद्यालय

nikhilesh yadav
विद्यालय को जेल समझने वालों तुम इतना सुन लो,
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो
माना कि अभी वक़्त तुम्हारा है इतिहास पढ़ने का,
मिलेगा मौका तुम्हें भी खुद अपना इतिहास गढ़ने का
माना कि अभी राह कठिन है, कठिन चढ़ाई पर्वत-सी,
थककर तुम यूँ बैठ न जाना, रखो हौसला चढ़ने का
मेहनत का ये मूलमंत्र है, शिक्षक की बातें गुन लो।
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो
बच्चों तुम छोटे हो अभी तुमसे ये हमारी अर्जी है
मानो या ना मानो आगे सिर्फ तुम्हारी मर्जी है,
लक्ष्य बनाओ ऊँचा अपना, यश पाने को जुट जाओ
मोबाइल के गेम तुम्हें, देते जो लक्ष्य वो फर्जी है,
देख परखकर तुम भी अपना स्वप्न सुनहरा-सा बुन लो।
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो।
तुमको पाना ही है यहाँ पर, नहीं कभी कुछ खोना है।
शिक्षा की सुगंध से महके, यहाँ का कोना-कोना है।
बरगद जैसी छाया इसकी, नभ जैसा विस्तार यहाँ,
इसके कद के आगे तो, पर्वत भी लागे बौना है।
सागर-सी गहराई इसमें, तुम जितने मोती चुन लो
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो।
भविष्य तुम्हारा रचनेवाला पुस्तक का हर पन्ना है,
तुमको वीर सुभाष, भगतसिंह, गांधी जैसा बनना है।
देश बनाने की ख़ातिर, कई वीरों ने बलिदान दिए,
दुश्मन के आगे तुमको भी, शेखर जैसे तनना है।
पहन बसंती चोला तुम भी, क्रांतिगीत वाली धुन लो।
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो।
नाम : निखिलेशसिंह यादव
जन्मतिथि : 21.10.1977
पता : शास्त्री नगर, गोविंदपुर रोड,
गोंदिया-441601(महाराष्ट्र)
सम्पर्कसूत्र : मोबाइल 9049516103
सम्मान : साहित्य सृजन सम्मान
प्रकाशन : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।