विद्यालय को जेल समझने वालों तुम इतना सुन लो,
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो
माना कि अभी वक़्त तुम्हारा है इतिहास पढ़ने का,
मिलेगा मौका तुम्हें भी खुद अपना इतिहास गढ़ने का
माना कि अभी राह कठिन है, कठिन चढ़ाई पर्वत-सी,
थककर तुम यूँ बैठ न जाना, रखो हौसला चढ़ने का
मेहनत का ये मूलमंत्र है, शिक्षक की बातें गुन लो।
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो
बच्चों तुम छोटे हो अभी तुमसे ये हमारी अर्जी है
मानो या ना मानो आगे सिर्फ तुम्हारी मर्जी है,
लक्ष्य बनाओ ऊँचा अपना, यश पाने को जुट जाओ
मोबाइल के गेम तुम्हें, देते जो लक्ष्य वो फर्जी है,
देख परखकर तुम भी अपना स्वप्न सुनहरा-सा बुन लो।
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो।
तुमको पाना ही है यहाँ पर, नहीं कभी कुछ खोना है।
शिक्षा की सुगंध से महके, यहाँ का कोना-कोना है।
बरगद जैसी छाया इसकी, नभ जैसा विस्तार यहाँ,
इसके कद के आगे तो, पर्वत भी लागे बौना है।
सागर-सी गहराई इसमें, तुम जितने मोती चुन लो
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो।
भविष्य तुम्हारा रचनेवाला पुस्तक का हर पन्ना है,
तुमको वीर सुभाष, भगतसिंह, गांधी जैसा बनना है।
देश बनाने की ख़ातिर, कई वीरों ने बलिदान दिए,
दुश्मन के आगे तुमको भी, शेखर जैसे तनना है।
पहन बसंती चोला तुम भी, क्रांतिगीत वाली धुन लो।
ये स्वतंत्रता की उड़ान है, अपने पंख यहाँ चुन लो।
नाम : निखिलेशसिंह यादव
जन्मतिथि : 21.10.1977
पता : शास्त्री नगर, गोविंदपुर रोड,
गोंदिया-441601(महाराष्ट्र)
सम्पर्कसूत्र : मोबाइल 9049516103
सम्मान : साहित्य सृजन सम्मान
प्रकाशन : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित