श्री विष्णु हरि डालमियां के निधन पर पर विहिप अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस श्री कोकजे का शोक संदेश

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vinod bansal

शोक प्रस्ताव

विश्व हिन्दू परिषद् के पूर्व अध्यक्ष श्री विष्णु हरि डालमियां के निधन से सिर्फ विहिप ही नहीं सम्पूर्ण हिन्दू समाज को एक अपूर्णीय क्षति हुई है. अपने शोक प्रस्ताव में विहिप अध्यक्ष श्री विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा है कि श्री डालमियां सरलता, सक्रियता, सौम्यता व दृढ़ता के संगम थे. वे विश्व हिन्दू परिषद् से एक लम्बे कालखंड तक जुड़े रहे. हर मुद्दे पर उनके सम्वेदनशील विचार मस्तिष्क को झकझोर देते थे. 1979 में प्रयागराज की पुण्य भूमि पर द्वितीय विश्व हिन्दू सम्मलेन के स्वागताध्यक्ष के रूप में जुड़े देश के ये प्रसिद्द उद्योगपति विहिप के उपाध्यक्ष, कार्याध्यक्ष व अध्यक्ष के रूप में सन् 2005 तक जुड़े रहे. वे 1992 से 2005 तक उदयपुर के महाराणा के बाद विहिप के चतुर्थ अध्यक्ष बने. वे एक महान गौभक्त, दानदाता के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी सेवा संस्थान, मथुरा के उपाध्यक्ष, श्री राम जन्मभूमि न्यास के प्रन्यासी तथा विहिप के संरक्षक व आजीवन प्रन्यासी थे. श्री राम जन्मभूमि के सन्दर्भ में हुईं विविध वार्ताओं में उनकी सक्रिय भूमिका थी. वे श्री राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर की अधूरी साध लेकर चले गए. उनके इस अधूरे सपने को पूरा करना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

17 जनवरी 1928 को राजस्थान के झुंझुनू जिलान्तर्गत चिडावा में जन्मे श्री डालमिया उद्योग – व्यापार जगत की अनेक नामीग्रामी कंपनियों, संस्थाओं, संगठनों यथा एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बैंक, चेम्बर्स ऑफ कोमर्स एंड इंडस्ट्रीज, फेडरेशन ऑफ इण्डियन चेंबर ऑफ कोमर्स एंड इंडस्ट्रीज इत्यादि के विविध पदों पर सक्रिय रहे.

जारी कर्ता :

विनोद बंसल

राष्ट्रीय प्रवक्ता

विश्व हिन्दू परिषद्,

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।