इन तीनों को अब दिल्ली लाइए

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vaidik
मैं पहले ही लिख चुका हूं कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के भाजपा मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्य में काफी अच्छे काम किए थे लेकिन उनकी हार का बड़ा कारण नोटबंदी, जीएसटी, अनुसूचित संशोधन कानून, फर्जिकल स्ट्राइक, सीबीआई और रफाल-सौदे आदि की बदनामियां रही हैं। सच्चाई तो यह है कि उन्हें उम्मीद से ज्यादा वोट मिले हैं। यह भी ठीक है कि इन हिंदी-प्रदेशों के लोग भाजपा में नए चेहरे चाहते हैं तो क्या यह उचित समय नहीं है, जबकि तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- शिवराज चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह को केंद्रीय मंडल में शामिल किया जाए ? ये तीनों जितने अनुभवी नेता हैं और इन्हें आम आदमियों की आकांक्षाओं की जितनी पकड़ है, उतनी मोदी-मंत्रिमंडल के एक-दो मंत्रियों की भी नहीं है। ये तीनों मिलकर केंद्रीय मंत्रिमंडल को काफी वजनदार और विश्वसनीय बना देंगे। इन तीनों राज्यों में हुए चुनाव के पहले ही मुझे लग गया था कि इन राज्यों में भाजपा का जीतना बहुत मुश्किल है। उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के कुछ नेताओं से हुई मेरी बातचीत में मैंने साफ-साफ कहा था कि ये तीनों मुख्यमंत्री हारें या जीतें, यह जरुरी है कि इन्हें केंद्र में लाया जाए और इनके अनुभव का फायदा देश को मिले। यह ठीक है कि मोदी के मंत्रिमंडल में राजनाथ, गडकरी, सुषमा स्वराज और पीयूष गोयल जैसे योग्य लोग हैं लेकिन ये तीनों नेता भी शामिल हो जाएं तो प्रधानमंत्री को भी उचित सलाह मिल सकती है। अभी तो भाजपा का ‘मार्गदर्शक मंडल’ मार्ग देखते रहनेवाला मंडल बन चुका है और मंत्रिमंडल भी ‘‘मातहतों का मौन समूह’’ बन गया है। यदि यह स्थिति अगले छह माह तक बनी रही तो भाजपा की सीटें 2014 के मुकाबले 2019 में आधी भी नहीं रह पाएंगी। मैं चाहता हूं कि भाजपा यदि विपक्ष में चली जाए तो भी वह सबल विपक्ष की तरह काम करे और यह भी संभव है कि मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाए तो भाजपा शायद इस लायक हो जाए कि वह जैसे-तैसे अपनी सरकार बना ले। इन तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के शामिल होने से मोदी सरकार की छवि में विनम्रता, उदारता और शिष्टता की भी अभिवृद्धि होगी। भाजपा के अच्छे दिन लाने के लिए भी यह करना जरुरी है।
डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।