
काश की इन मुर्दा लाशो में से किसी को जगा पाते।
देश मेरा बदनाम नहीं होता,नेता अगर हिंदुत्व ला पाते।
नही बट पाता टुकडों में जाति पात के नाम पर।
अगर मेरे भाई सच्चा भाईचारा निभा पाते।
हो रही चारो ओर रुसवाई है, ये खबर किसने फैलायी है।
मरे नही हम जिंदा हैं, काश ये सबको बता पाते।
राजनीति हो रही घिनौनी,धर्म के नाम पर आडंबर है।
नेता बने भक्षक है,काश थोड़ा देशधर्म दिखा पाते।
हो जाता दूर अँधियारा ,आज जो यहाँ छाया है।
गर, जो सभी हिंदुस्तानी मिलकर प्यार बटा पाते।
संध्या चतुर्वेदी
मथुरा उप

