बोध नया भरना होगा’

brajesh pandey
अब नहीं शर्मिंदा होंगे,
फांसी पर लटकाने से।
छिप जाओ किसी बिल में
बच नहीं सकते हम वीरों से।
नक़ाब हटाने में
कुर्सी पलटाने में
तानाशाह किसी सैन्य को
बनना पड़े तो बन जाने दो।
चेतना जागृत सम्यक बोध
अधिकारों को समझाना होगा
जन जन में भागीदारी का
बोध नया भरना होगा।
अत्याचारी आतंकी को
अब बख़्श नहीं सकते
बार बार का क्षमादान
हम कर नहीं सकते हैं।
शीश एक काटोगे तो
हम सौ सिर को काटेंगे
तुम्हारी छाती चीर कर
लहू से तिलक लगाएंगे।
जहाँ नेतृत्व चाटुकारी होगी
उसे भी जमींदोज कर देंगे
समझौता किया राष्ट्र से जो
उसे बहिष्कृत कर देंगे।
          #बृजेश कुमार पाण्डेय ‘बृजकिशोर’
परिचय : 
पूर्ण नाम- बृजेश कुमार पाण्डेय

साहित्यिक उपनाम- ‘बृजकिशोर’

वर्तमान पता- ग्राम पोस्ट-परासी, तहसील- मनगवां
जिला- रीवा, मध्य प्रदेश
विधा- कविता (‘अन्तर्मन दर्पण’ प्रकाश्य), गीत, हाइकु, ग़ज़ल, कहानी, लघु कथा
जन्म स्थान – इलाहाबाद, उ.प्र.
शिक्षा- परास्नातक हिन्दी (इलाहाबाद विश्वविद्यालय)
सम्प्रति- रीवा के शासकीय विद्यालय में अध्यापक
साहित्यिक परिचय–
वर्तमान अंकुर पत्रिका” नोएडा में प्रकाशित रचनाएं- ‘पतवार शिथिल अब बँधी नांव’ और ‘वन्य जीवों की व्यथा’
‘हिन्दी भाषा’ राष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित ‘आँसू की दास्तां’ कविता
‘विजय दर्पण’ मेरठ के ‘साहित्य दर्पण’ में प्रकाशित ‘शर निषंग तोड़ सकें’
काव्य स्पंदन पत्रिका में अनेक रचनाएं प्रकाशित
‘अमर उजाला’ पत्र के ‘काव्य स्तम्भ’ में कई रचनाएँ प्रकाशित।
प्रमुख कविताएँ- अपराधी कैसे नाबालिग है, अनाथ बच्चों की पीड़ा, नारी ईश्वर की इच्छा है, किसानों की दुर्दशा, कितने अकेले हैं, कुछ अंजान चेहरे, मानवीय संवेदना हो गई है सुप्त, कलमुंही का सौंदर्य आदि।
पाक्षिक ‘साहित्य सुधा’ में प्रकाशित कविता ‘नारी जीवन बन जाती है’ 
प्रकाशित कहानियाँ- रिश्वत, समय रुकता नहीं, महत्त्वाकांक्षा आदि
सम्मान- १. साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा ‘श्रेष्ठ टिप्पणीकार’ सम्मान
२. साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ रचनाकार’ सम्मान
३. साहित्य संगम संस्थान द्वारा पर्यावरण दिवस पर ‘पर्यावरण चेतना सम्मान’
४. लोकबोली संवर्धन सम्मान (अवधी हेतु)
५. मुक्तिबोध पर साहित्य सृजन हेतु सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान

matruadmin

Next Post

बारिश

Wed Jun 27 , 2018
चल रही है झूम के हवाएं, बादलों ने शोर मचाया है । बदला सा मिजाज मौसम का, कोई दस्तक देने आया है ।। रंग बदला है पत्तो ने अपना, पेडों ने गीत गुनगुनाया है । डाली डाली चहक रही, आनन्द हृदय में समाया है ।। सौंधी सौंधी खूश्बु माटी की, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।