मैंने तुमको खो दिया इस जिंदगी की कसमकश में किन्तु तुमको देख पाया प्यार की प्यारी बहस में प्रेम की पीड़ा विरह के अश्रुओं को याद करके फिर तुम्हारे रंग में ढलना चाहता हूँ, मैं तुम्हारे साथ चलना चाहता हूँ।। जिंदगी को घोलकर के जब पिया तब होश आया कौन […]

आंखों में आंखें डालकर सच को सच दिखाता आईना चेहरे पर लगे हों मुखोटे हजार क्षणभर में हटा देता आईना बड़ी खामोशियत से कहता लेकिन कौन सुनता बात आईना हर बुराई से पर्दा उठाता फिर पत्थर खाकर टूटता आईना टुकड़ों -टुकड़ों में टूटता-बिखरता लेकिन तब भी मुंह चिढ़ाता आईना इंसान […]

लम्हा लम्हा तकल्लुफ़ में टूटते रिश्ते, बदन से रूह तक उकता रहें है रिश्ते। ये दिल के रिश्ते सब अजीब से रिश्ते, साँस लेते ही टूट से जाते हैं रिश्ते । टूटी सांस तो दर-ओ-बाम हुए रिश्ते, देते रहे अहबाब दिलासे बाहरी रिश्ते । अशिया की तरह बिक गए सारे […]

ये प्यादे भी उछलते बहुत हैं आम लोगो को छलते बहुत हैं बना रखा मिजाज गिरगिट सा पल-पल में रंग बदलते बहुत हैं मेहनत से जी चुराने वाले भी ना किसी कामयाब से जलते बहुत हैं कैसे समझाए भला इन मूर्खो को कम दिमाग वाले मचलते बहुत हैं इसलिए तो […]

कहते हैं प्यार एक बला है जमाना इस बला को गले लगाता क्यों हैं ? प्यार की एक नजर कैसे छू जाती है नजर को अजनबी- अनजाने से बावरे बन क्यों जीने लगते हैं एक संग ? प्यार जब इश्क बन जाता है तब रुहें एक हो जाती है एहसास […]

लगता है हमारा आपका साथ बस यही तक था। आप अपने आप को बहुत व्यस्त समझते हो। और सामने वाले को अपने से कम समझते हो। जबकि सामने वाला व्यस्त होते हुये भी दोस्तो से मिलता है। हमारी और तुम्हारी सोच में यही बहुत बड़ा फर्क है। इसलिए दोस्त आप […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।