कोई आंखों से पिला दे या जाम से, मुझे सुरुर नहीं होता, मैं थोड़ा बहुत,बहुत कुछ कर लेता हूँ, मुझे गुरुर नहीं होता। एक ऐसा शख्स है जो मेरे दिल में, धड़कन में घर किए है, मैं पूरी कोशिश करता हूँ मगर ,वो मुझसे दूर नहीं होता। मैंने उसका जिक्र […]

(कश्मीर में भारतीय सेना पर पत्थरबाजी पर)  खुली छूट अब चाहिए,सेना के वीर जांबाजों को, अच्छा सबक सिखाना है,दुस्साहसी पत्थरबाजों को| इनके घर में छुप के बैठे,आतंकी जो इनके आका, पैलेट गन से छलनी कर दो,देश पे डाले जो डाका| हिंदुस्तान में रह खाकर भी,ये पाक परस्ती करते आए, हुर्रियत […]

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एक तू ही तो है, मेरी सुख दुःख की सहेली.. तू ही तो सुनती है, मन की बात… सखी खिड़की। जैसे ही खोलती हूँ, मेरी बंद सासें चलने लगती हैं.. मेरे सपनों की, भीतर और बाहर भी तू ही गवाह है। रोज़ सुबह सूरज संग मिलाती, रात चाँद संग सुला […]

धर्म बस एक ही है,करे उपकार सदा; हिन्दू धर्म आपस में,हीय मिला रहा। पूजन विधान भिन्न,मंदिर मस्जिद चिन्ह: चर्च गुरुद्वारा को भी,मान दिला रहा। धर्म है सिखाता हमें,सुनो मेरे देशवासी; संविधान वो नहीं जो,मांस खिला रहा। धर्म निरपेक्षता की,बात करते हैं सभी; भारत का संविधान,देश हिला रहा।।       […]

जब भी आओगे मुझे मौजूद वहीं पाओगे, वक्त की निशानियों का एक पहरा हूँ मैं। मैं कोई दरिया नहीं जो कहीं भी बह जाऊँगा, तुम भी वाकिफ हो कि झील-सा ठहरा हूँ मैं। मौसम कोई भी आए अब न होगा गुलबहार, बारिशें भी जानती हैं बंजर सहरा हूँ मैं। बस […]

जाने कितनी साज़िशें रची गई, दरम्यान हमारे.. किसी ने जरा-सा भी कुछ कह दिया अफसोस यकीन तुमने कर लिया। एक बार भी दिल की न सुनी, कि आवाज सुन लेते दिल बेचारा.. कब से यही कह रहा , कहीं ये साज़िश तो नहीं। अब समझने-समझाने की बात ही न रही, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।