मैं तपती धरती हूँ प्रियतम, तुम पावस की हो जल धार मिल जाए गर नेह तुम्हारा मना लूं मैं भी एक त्यौहार। जब-जब खिली चांदनी छत पर, तारों संग बारात लिए चुनर डाल चली सिर ऊपर शरमाई मधुमास लिए पायजेब ही शोर मचाए सौतन-सा करती व्यवहार।मिल जाए….।। छोटी-सी बदली ने […]
कविता आँखें खोलती,कविता लड़ती जंग कविता लाती चेतना,कविता भरती उमंग। कविता दिल में उतरती,कविता करती मार कविता जोश उभारती,कविता की तलवार। शस्त्र सिर्फ कर सकते,तन पर ही प्रहार अंतर्मन झकझोरती,ये कविता की धार। कविता जब लगाती है,अपनी तेज हुंकार अर्जुन भी उठ खड़ा हो,करता है ललकार। याद दिला इतिहास का,बढ़ाती […]
