नमन प्रातः की सबसे करता, सब मन से लेना स्वीकार। भेदभाव अरु द्वेष भुलाकर, आपस में सब करना प्यार।। मैं तो अकिंचन कर को जोड़े, आता सबके उर के द्वार। मात-पिता के चरण चूम के, करता हूँ सबका सत्कार।। गुरुजन प्रियजन उर मैं बसते, इनको नमन हजारों बार। वीणावादिनी वंदन […]
