प्रकृति की बात ही निराली कभी खज़ाना न हो खाली खनिज संपदा भरपूर देती बदले में कुछ भी न लेती दोहन कितना भी हम कर ले आरी,कुदाली से वार कर ले तनिक भी रुष्ट प्रकृति न होती फिर भी हमे पोषण ही देती मां का दूसरा रूप प्रकृति अपने आंचल […]

कश्मीर के पुंछ में एक राजपूत परिवार में इस बालक का जन्म होता है बालक लक्ष्मण दास बचपन में बहुत चपल और उद्दंड थे, अपने मित्रों के साथ बहुत शरारत करते। युवावस्था की कुछ घटनाओं के कारण लक्ष्मण दास का मन सांसारिक संबंधों और परंपराओं से विलग हो गया था […]

ह्यूमन ट्रैफिकिंग यानि कि मानव तस्करी का आशय तो आप सभी लोग जानते ही होगे, और क्यूं नहीं शब्द में ही जो अर्थ निहित है! किसी व्यक्ति को धोखा देकर, डराकर, बलपूर्वक बंधक बनाकर कई तरह के प्नलोभन देकर उनकी इच्छा के विरूद्ध कार्य करवाकर खुद का स्वार्थ देखना ही मानव […]

कोरोना के आंकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं और जिंदगी जो ठहर सी गई थी धीमे धीमे रफ्तार भी पकड़ने लगी है। कुछ कंटेनमेंट जोन को छोड़कर बाकी हर जगह लगभग सारी गतिविधियां शुरू होने लगी हैं। जब कोरोना के मामले सैकड़ों में थे तो लॉकडाउन लागू किया गया पर […]

जिनसे हमें जीवन मिलता शुद्ध हवा का झोंका मिलता बारिश रह रहकर आती आकर हमारी प्यास बुझाती धरती मां का कटाव यह रोके फल- फूल से बगिया महके इन सबका आधार वृक्ष है पर्यावरण का वरदान वृक्ष है फिर इन पर क्यों आरी चलाई इन वृक्षों पर क्यों दया न […]

नहीं रहेगा आपस में, मेल जोल इंसानो में। तो कहां से जिंदा रहेगी, इंसानियत अब दिलो में। रिश्ते नाते भी अब, मात्र नाम के रह गये। न आना न जाना घर पर, बस दूर से ही नमस्कार।। जब दूरियां बनाकर ही, सभी को रहना पड़ेगा। तो कहां से भाईचारा, दिलो […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।