मानव तस्करी

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ह्यूमन ट्रैफिकिंग यानि कि मानव तस्करी का आशय तो आप सभी लोग जानते ही होगे, और क्यूं नहीं शब्द में ही जो अर्थ निहित है! 
किसी व्यक्ति को धोखा देकर, डराकर, बलपूर्वक बंधक बनाकर कई तरह के प्नलोभन देकर उनकी इच्छा के विरूद्ध कार्य करवाकर खुद का स्वार्थ देखना ही मानव तस्करी है!
मानव तस्करी में लोग बंधक बना कर उनसे देह व्यापार,घर के काम, गुलामी इत्यादि तो करवाते ही है और उनके शरीर के अंग किडनी,आँख,खून इत्यादि का भी व्यापार करते है! बात यही पर नही रूकती वो लोग जबरजस्ती नशीली दवाओं की तस्करी भी करवाते है, छोटे बच्चों से भीख मंगवाते है और जबरन वेश्यावृत्ति में लाकर अपने अनुसार काम करवाते है!
अब सवाल ये उठता है कि तस्करी के लिये वो किन लोगों को लक्ष्य बनाते है,मेरे विचार से जहां तक मैने जाना है वो गरीब लोगों को काम का प्रलोभन देकर, बच्चों को लालच देकर,युवाओ को नशे की लत लगवाकर और कुछ किस्सों में जबरजस्ती अगवा करते है हालांकि इस गिरोह कि किसी से कोई दुश्मनी नही होती है उनका उद्देश्य मात्र अपना मुनाफा ही रहता है!
संयुक्त राज्य की एक रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील राष्ट्रों में 41% महिलायें, 28% बच्चें और 20 % पुरूष तस्करी के शिकार होते है,हालांकि विकसित राष्ट्रों में ये दर बहुत कम है!
मानव तस्करी का कार्य करने वालो में 63% पुरूष और 37% महिलायें हैं जो इस कार्य को करने में संलग्न रहते है, कुल तस्कर लोगों का 43% हिस्सा अपने देश में कार्य करता है बाकि हिस्सा दूसरें देशों मेॆ भेज दिया जाता है(ये सारे आँकडे मैं संयुक्त राज्य की रिपोर्ट से कह रहा हूं)!तस्करी की शिकार महिलायें लगभग 72% सेक्स उद्योग में लगायी जाती है,भारत में एक गरीब लड़की को वेश्यावृत्ति अपनाने के लिये मात्र 48% घंटे का समय लगता है और वो इस कार्य मे संलग्न हो जाती है!
अब किसी भी राष्ट्र के सामने ये सवाल आता है कि मानव तस्करी को कैसे रोका जाये? ये बहुत ही कठिन कार्य है जिससे प्रशासन अकेले नही निपट सकता उसके लिये हम सभी को जागरूक होना पड़ेगा,सभी को स्वयं की सुरक्षा के गुण सीखने होगे, जो कि हमारी संस्था कर रही है,ये वाकई में सराहनीय कार्य है, ये मानवहित का कार्य है,हम सबको चाहिए कि कोई भी संदेह वाला व्यक्ति दिखे या किसी को कोई परेशान करता दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दे और अपना जागरूक नागरिक होने का प्रमाण प्रस्तुत करे! क्या पता आपका एक कदम किसी के भविष्य को आग की भट्ठी में झुकने से बचा लें! और जीवन में नयी किरण का संचार करे! धन्यवाद!

ललित प्रताप सिंह

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।