भाग्य जिसे दुर्भाग्य बन पग पग पर छलता रहा वो सूर्यपुत्र हो अंधकार से जीवन भर लड़ता रहा जन्मा सूरज के औरस से त्यागा लोक लाज के भय से कुरुवंश का ज्येष्ठ पुत्र सिंहासन का यथार्थ अधिकारी रहा उपेक्षित जीवन भर थी विडम्बना उस पर भारी सूतपुत्र होना उसको जीवन […]
