वतन की चाह में जो मगन हो गया तिरंगे में लिपटा जिनका बदन हो गया शत शत नमन वीर सपूतों को हमारा तिरंगा ही जिनका कफन हो गया लाडले ही रहे अपनी माँ पिता के नतमस्तक जिनका गगन हो गया बात ही क्या करें उनके हौसलों की निछावर जिनका तन […]

समस्या का निदान कैसे होगा टपकती छत मकान कैसे होगा तड़प भूख की खाने को लाले पड़े बिखरा पड़ा जो सामान कैसे होगा जीना मुहाल गरीबी में आटा गीला गुजारा भला आसान कैसे होगा चिंता सताती है जवां बेटी की बाप को बेटी का भला कन्यादान कैसे होगा अब तो […]

आँखों में आँसुओं की धार देखते हैं आदमी को बेबस , लाचार देखतें हैं कैद होकर रह गया चारदीवारी में उजड़ा हुआ अब तो बाजार देखते हैं कैसा है कुदरत का कहर देखो यारों बन्द पड़ा सारा कारोबार देखते हैं वीरान है गांव शहर और जहां सारा उजड़ी बस्ती खोई […]

घर मुझे जन्नत से प्यारा मिला खुशनुमा परिवार हमारा मिला इससे महफूज जगह कोई नहीं दर्द भी कांपता और हारा मिला एकदूसरे से इतनी हिम्मत मिली सच हमे अपनो का सहारा मिला बच्चो की मुस्कुराहट किलकारियां हँसी ठिठोली का जैसे नज़ारा मिला #किशोर छिपेश्वर ‘सागर’ परिचय : किशोर छिपेश्वर ‘सागर’ का वर्तमान […]

रंगों का त्यौहार मनाएं होली में मिल जुलकर प्यार बढ़ाए होली में संग मित्रों के साथ हमारी टोली हो खुशियों को आधार बनाएं होली में भाईचारे अपनेपन का रंग पक्का हो शांति का व्यवहार बनाएं होली में धूम धड़ाका हो और हो बाजा गाजा घुंघरू की झंकार बनाएं होली में […]

नफरतों से मुंह तो मोड़ो मोहब्बतों का चलन तो कर लो छोड़ो ये सारे लड़ाई झगड़े अमन का तुम वतन तो कर लो कि भाई भाई गले लगालो कुछ ऐसा यारो जतन तो कर लो मिला ही क्या है वो लड़ने वालों खुशी से धरती गगन तो कर लो कि […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।