तू ही जननी, तू ही विनाशनी, तू ही शक्ति स्वरूपा है। तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही माँ जगदम्बा है। ममता का वात्सल्य भी तू है, तू ही गौरी माता है। सतीत्व की मूरत है तू, कभी सावित्री कभी अनुसूया माता है। तू ही दिति, तू ही अदिति, […]

अमीरी गरीबी में बटी ये इंसानों की बस्ती कहीं कोई घर है अंधियारे में डूबा हुआ कहीं किसी घर में अँधेरा है शौक का कहीं जिंदगी ये बनी है दर्द सी कहीं दर्द बनी है ये जिन्दगी कितनी जुदा है ये इंसानों को बस्ती भूख से व्याकुल कहीं रोती है […]

ये कैसा जमाना आया है हर जगह छल-प्रपंच और माया है देखने में तो सुन्दर काया है अन्दर प्रेत की छाया है भादों मास में भी धूल जमा है हर घर में गमले में फूल लगा है पेड़ों का कोई निशान नहीं है शायद कोई अब इंसान नहीं है प्रकृति […]

बन उम्मीदे आई ये बारिस जीवन मे नये रंग लाई ये बारिस सुखी वसुंधरा की प्यास बुझे गी है बंजर जो जमीन वो फिर से खिले गी ये बारिस सिर्फ बारिस नहीं है ये उम्मीद है किसी किसान की तो किसी सूखे सरोवर की प्यास है इस बारिस मे खिलेगी […]

क्यूँ इस जहा में हम बेटियों के लिए प्यार नहीं क्यूँ हमसे कोई उम्म्मीद नहीं,हमारा इंतज़ार नहीं। हे धरा ,वसुंधरा हे माँ अवनि ,विकेशी तुझसे हर बेटी अब पूछती है यही। मेरे प्रश्नों का माँ देना उत्तर सही पूछती है ये बेटी आँखे आंसुओ से भरी। क्यूँ धरा पर हमें […]

हर शाम वो लड़की अपनी छत पर खड़ी रहती मानो मेरा और बस “मेरा” इंतज़ार करती रहती थी,, मैं भी जानता था की वो वही खड़ी होगी.. ये वाकया तो हर रोज़ का था,, कभी कभी जब वो वहां न दिखती तो मैं भी धीरे धीरे से उसकी गली में […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।