मैंने ओढ़ी चुनर पिया नाम हो गई मगन मैं तो आज । लाल लाल चुनर में हीरे जड़वाए गोटा लगवाया झालर दार मैंने ओढ़ी चुनर पिया नाम … चम चम चमके चुनर मेरी छम छम बाजे पायल मेरी झूमू मगन होकर आज मैंने ओढ़ी चुनर पिया नाम …. लाल लाल […]

वो आकाश, वो चांद, वो सितारे, छत पर सोते देखे थे हमने नजारे । अब कहां वो सब हमारे नसीब में, बहुमंजिलोंं में बदल गऐ घर हमारे । जिन्दगी जी रहे हम भागदोड में, दिमाग चल रहा अब जोडतोड में । कहाँँ रहे अब वो मस्त हंसीठहाके, खुद को भूला […]

ग़ज़ल …………1 जख़्म कितने छुपाने पड़े। सौ   बहाने  बनाने   पड़े। ==================== आँसुओं पर नज़र जब गई, हैं  ख़ुशी  के  ,जताने  पड़े। ==================== जो  तरफ़दार बनकर मिले, नाज़   उनके  उठाने   पड़े। ==================== पास थे जो शिक़ायत,गिले, आज दिल से हटाने   पड़े । ==================== जो ख़ुशी ने  दिए   फायदे, सब  हवा  में  […]

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मेरे सामने की दीवार पर एक पुराना-सा चित्र टंगा हुआ है… जिसमें प्रकृति के नज़ारे हैं, और एक नदी बहती-सी प्रतीत होती है… वहीँ पास में कुछ घर भी दिखाई देते हैं, और वे भी मुस्कुरा रहे हैं… सब कुछ देखने पर मुस्कुराता ही नज़र आता है, पर कोई है […]

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ज़िन्दगी के रास्ते इतने आसान न होते, अगर आप हम पर मेहरबान न होते l आप चाहते तो ये काम कल भी हो जाता, हम आज भी इसके लिए परेशान न होते। कितना अच्छा होता,हमारी गिनती इंसानों में होती, आप हिन्दू न होते,हम मुसलमान न होते। ये विश्वास और भरोसे की […]

1]बस्ता सब  बच्चों पर  भारी है। पढ़ना-लिखना जब लाचारी है। शिक्षा  इक  ऊँचा   मंसूबा  है, इसका  लेकिन  खर्चा भारी है। पूरब पर पश्चिम का रुतबा पर , ये  पीढ़ी  उसकी  आभारी   है । पढ़े  लिखों में  बिसरी  बेगारी, अनपढ़ अनगढ़  सत्ताधारी है। लायक  सारे  नाप   रहे  रस्ते, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।