क्यों करता हूं कागज काले । बैठा एक दिन सोच कर यूं ही , शब्दों को बस पकड़े और उछाले । आसमान यह कितना विस्तृत , क्या इस पर लिख पाऊंगा । जर्रा हूं मैं इस माटी का, माटी में मिल जाऊंगा। फिर भी जाने कहां-कहां से , कौन्ध उतर […]

(लय :-तेरे चेहरे से नजर नहीँ हटती नजारे हम क्या देखें) प्यारे भारत ,प्यारे भारत ,तुझपे मैं कुरबां कुर्बानी कोई क्या देखे । मेरे दिल पे ये तेरे ही निशां निशानी कोई क्या देखे । धरती पे तेरी ये मुल्क समाया है ,सारी ही दुनियां में हमको ये भाया है […]

स्वार्थ के वश सब अपनी सोचे ,                    देश की है किसको चिंता । एक स्वार्थ से सब स्वार्थ सधेंगे,                    सोचो तुम जो हो जिन्दा । बाग ही गर जो उजड़ गया तो […]

महंगी पड़ गयी तुम्हारी मोहब्बत हमें   कुछ लिया भी नहीं और सब कुछ दे दिया     वैसे इतना भी बुरा नही था ये सौदा   हमको भी तो मिला रात भर आँख खुली रखने का काम   आँख मिच के भी ना सोने का काम   बिना तुम्हारी […]

कौन है तू,कभी तो मुझसे भी मिल जरा, भगवान मान मन्दिर में आठ याम तुझको पूजा। दिया खुदा का नाम,दिनभर नमाज अदा की, शबद कीर्तन में सुबहो-शाम तुझको याद किया। गिरजों के घण्टों ने न जाने कितनी बार तुझे पुकारा, प्रकृति,ईश्वर,खुदा,भगवान,गॉड न जाने कितने नामों से तुझे पुकारें। पर कौन […]

तेरी जुल्फों की छांव में तपती कड़क धूप भी, झिलमिल-सी लगती है। साथ तेरा जो हर पल बना रहे, तो तन्हाई भी महफ़िल-सी लगती हैll हाथों में हाथ थाम तेरा राह चलूँ, तो राह भी मंजिल-सी लगती है। रंगत रंगों की तुझसे ही तो है, रंगों में तू तो शामिल-सी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।