पाक है तू…. उस नूर ए खुदाई सी यकीं रख…ख़ुद पर काबिल है तू.. आसमाँ की ऊंचाई सी राह में रखा कोई कंकर नहीं जो आया उसने उछाला श्रद्धा है तू मीरा की भक्ति सी यकीं रख….ख़ुद पर प्रीत है तू राधा के नाम सी प्रेम किया …रूह रूह बसा […]

   *ज़ी करता है तुझे याद आऊँ अब* क्यूँ न हर पल तेरी आग़ोश में बिताऊं अब दिल के दाग जुदाई वाले तुझे मैं दिखाऊँ अब थक गई हूँ मैं तुझको  याद करते करते हो ऐसा की मैं तुझको याद आऊँ अब. ख़्वाबों में मिलती रही तुझे मैं शामों सहर […]

क्यूँ मेरी ज़िंदगी भी    पर्दे सा किरदार निभा रही है.. ज़रूरत के हिसाब से   कभी गिराई जा रही हूँ .. तो कभी उठा दी जाती हूँ …   जिसको जैसी ज़रूरत वैसी ही मुझसे अदाकारी करवाई जा रही है .      मेरे वजूद का क्या…. मेरी मनमर्ज़ीयों […]

तेरे कांधे पे जब मेरा सर होगा मेरे अश्कों से भीगा फ़िर तेरा भी चेहरा होगा दो बूँदे जो तेरे पलकों पे ठहर जाएँगी .. उसपर भी हमारी मुहब्बत का पहरा होगा छुपा सकोगे तुम भी क्या ग़मो की सिलवटों को फ़िर अधूरी सी हमारी चाहतों का हम दोनो के […]

अनकही सी लबों पे रूकी ख्वाहिशें   सहमी सी गुमशुदा सी .. हुई मुहब्बत में मैं लापता सी … इक खता की  हुई ख़ुद से भी मैं जुदा सी .. इक जफा जो .. बनी सजा हीं.. पर दबी रही रूह में उमर भर की वफ़ा भी हरकत लफ़्जों की […]

आओ तुम्हें तुम्हारे वादों में सूखी दरारें दिखाती हूँ .. वादे तुम करके भूलते हो. और उदास मैं हो जाती हूँ .. कब कहती हूँ.की तोड़ लाओ सितारे आसमान से .. मैं तो खुद सितारे टूटने के इंतज़ार में आंगन में सो जाती हूँ तुमसे तुम्हारा थोड़ा वक़्त मांगती हूँ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।