तेरे कांधे पे जब मेरा सर होगा

0 0
Read Time1 Minute, 25 Second

deji bedi juneja

तेरे कांधे पे जब मेरा सर होगा
मेरे अश्कों से भीगा फ़िर
तेरा भी चेहरा होगा
दो बूँदे जो तेरे पलकों पे ठहर जाएँगी ..
उसपर भी हमारी मुहब्बत का पहरा होगा

छुपा सकोगे तुम भी क्या
ग़मो की सिलवटों को फ़िर
अधूरी सी हमारी चाहतों का
हम दोनो के दरमियाँ फेरा होगा ….

तेरे कांधे पे जब मेरा सर होगा
मेरे एहसासों पे तेरी बाहों का घेरा होगा .

हल्की सी हसी लबो पे तेरे ..तेरी
नमी को क्या छुपा पाएगी….
छलक कर वो भी तो
मेरी रूह तक को भीगा जाएगी
झुकती निग़ाहे थरथराते लब मेरे
एक अरसे बाद तेरे हाथो में मेरा चेहरा होगा .

रोक पाओगे तुम भी क्या
जज़्बातों को यूँ अपने फ़िर
मिलन बिछड़ी ख्वाहिशों का
तेरी आग़ोश ही मेरा डेरा होगा…
छू लेंगे बस इक दूजे को निगाहो से ..
रूह का रूह से मिलन तेरा मेरा होगा

तेरे कांधे पर जब मेरा सर होगा
तेरी महकती सांसो का गर्म घेरा होगा ..

#डेज़ी बेदी जुनेजा
परिचय-

नाम………डेज़ी बेदी जूनेजा 
जन्मतिथि……1मई 
पता…….मोहाली (चंडीगढ़ )

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जल की पाती

Tue Mar 12 , 2019
जल कहता है इंसान व्यर्थ क्यों ढोलता है मुझे प्यास लगने पर तभी तो  खोजने लगता है मुझे । बादलों से छनकर मै जब बरस जाता सहेजना ना जानता इंसान इसलिए तरस जाता । ये माहौल देख के नदियाँ रुदन करने लगती उनका पानी आँसुओं के रूप में इंसानों की […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।