हर साल गणतंत्र दिवस पर पूरे देश यह नारा लगता है अमर रहे गणतंत्र हमारा लेकिन कैसे ?बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है।भारत का इतिहास गणतंत्र के मामले में बहुत पुराना है।बालि जरासन्ध कंस दुर्योधन नन्द जैसे राजा गणतंत्र को कमजोर या समाप्त करने के प्रयास करते रहे पर जनसमर्थन योग्य राजनीतिज्ञों-कूटनीतिज्ञों […]

कल तक जो राम और राम सेतु का अस्तित्व नकार रहे अब गिरगट बन चोला बदले मन्दिर मन्दिर हैं पधार रहे। यह गिरे और गिराया स्तर जिन्दा झूठी शान व आन रहे जनता भी हो गयी जागरूक सिखाती सबक जो याद रहे।।   दो से नवासी सत्ता प्यासी मौज कर […]

गांव में बहती नदी किनारे एक महात्मा जी रहते थे सभी को कर्म अपना करना है प्रवचन में प्रतिदिन कहते थे दूर-दूर से श्रोता थे आते सुन-सुन उपदेश वापस जाते धन्य कर रहे थे धरा को जो शरीर को साधन बतलाते प्रातः काल भ्रमण को जाते नदी स्नान कर वापस […]

है,प्रित जहाँ की मैं बात वहाँ का करता हूँ,  हिन्दुस्तान  का रहने वाला हूँ हिन्दी में बात करता हूँ । लोग मुझे जो  कहे  प्रवाह नही मुझे कुछ और नही,बस हिन्दी में , बात करना आता है । अंग्रेजी,चीनी,रुसी,है बिदेशी इनकी  बात मैं क्यो करु हमारी प्रिय भाषा है,हिन्दी मैं […]

भूटान एयरपोर्ट से बाहर आते ही मिस्टर एंड मिसेज वर्मा अपने गाइड को ढूंढ ही रहे थे, तभी दौड़ता भागता एक नौजवान आया जो भूटान की पारंपरिक वेशभूषा में था और उनके नाम की तख्ती लिए हुए था ,वह उनकी ओर  देखते ही  बोला -“आर यू मिस्टर एंड मिसेस वर्मा” […]

भविष्य निखारता, ज्ञान है बाटता। इंसानियत का पाठ पढ़ाता, अंधेरा हटा उजाला लाता। सपनों को पूर्ण करने मे ,हमे सही राह दिखाता। जीवनपथ पर डटते हुए है, चलना सिखलाता। बच्चों का पढ़ने मे कैसे है ध्यान लगवाना,कला यह बखूबी जानता। ज्ञान का इसमें भंडार भरा है,यही गुरु,यही ब्रह्मा है। धैर्य […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।