Tag archives for aashutosh

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चंदा मामा

चंदा मामा थे जो बचपन में अब वह जानू प्रियतम हो गए। किस्से वह बिक्रम बेताल के व्यभिचारी डाल पर सो गए।। सार्थकता वह पंचतंत्र की फिल्मों में अब समा…
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वर्षा का इंतजार 

सनन सनन करती चलती पुरवाई है। मौसम की मुझसे ई कैसी रुसवाई है।। तेज हवा के झोंके आकर पूरव से पश्चिम बल खाकर बादल को उड़ा ले जाते हैं तेज…
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स्त्री रूप तेरे

हे स्त्री वह भी तुम्ही हो जब धरातल पर मैं आया सर्वप्रथम तुम्ही ने वात्सल्य प्रेम से मुझको सहलाया हां वह भी तुम्ही हो बड़ा होते ही जिसका स्नेह मिला…
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अपना आज का भारत 

यह भारतीय  देश  है ऐसा जो अपने बेटों पर रोता है। कुछ शहीद यहाँ तो बाकी व्यक्ति भ्रष्टाचारी  होता हैं।। भ्रष्टाचार बढ़ा यहाँ पर इतना लोग कहते विकास न होने…
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प्रिये……….

फसल लहलहाती तुम अफीम की मैं सूखा  पीड़ित  ईख   खेत  प्रिये हो मिट्टी तुम चिकनी और मुल्तानी ज्येष्ठ धूप में तपती मैं गर्म रेत प्रिये हो छड़ी  जादुई बालपरी  की …
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