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मध्यप्रदेश में एक तरफ जहां विभिन्न यात्राओं के बहाने शिवराजसिंह चौहान ने अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की रणनीति चला रखी है,वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय नेतृत्व भी मध्यप्रदेश में सरकार से नाराज पाटीदार समाज को अपने से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। […]

गिरकर उठने में माना,थोड़ा वक्त लगता है, टूटे दिल को संभलने में,थोड़ा वक्त लगता है। शक न करना कभी,मेरे मजबूत इरादों पर, आँधियों में दीप जलाएं,थोड़ा वक्त लगता है। यह तो सच है फैली है देश में,आतंक की बेल, आतंकियों को मिटाने में,थोड़ा वक्त लगता है। बोए हैं बीज कुछ […]

हौंसला हो पास जिसके,पंख की जरुरत नहीं, प्रीत का विश्वास संग हो,साथ की जरुरत नहीं। आस्था ने सदा जिसे,जीने का संबल दिया हो, हर दिवस खुशियाँ मिलें,मधुमास की जरुरत नहीं। दिल मिले न कभी,ख्याल भी हों जुदा- जुदा, साथ फिर भी चल रहे,अलगाव की जरुरत नहीं। एक हो मंजिल अगर,मुसाफिर […]

न मनुस्मृति जलाईए,न संविधान जलाईए। जलाना है अगर कुछ तो नफरत जलाईए॥ मिटा दिजिए भेदभाव,धर्म- जाति के नाम पर, प्रतिभाओं को बचाना है,तो आरक्षण जलाईए॥                 #अ.कीर्तिवर्धन परिचय : अ.कीर्तिवर्धन का जन्म १९५७ में हुआ है। शामली (मुज़फ्फरनगर)से आपने प्राथमिक पढ़ाई करके बीएससी मुरादाबाद से […]

‘चौराहे पर लुटता चीर प्यादे से पिट गया वजीर, चलूँ आखिरी चाल कि बाजी छोड़ विरक्ति रचाँऊ मैं, राह कौन-सी जाँऊ मैं ?’ ‘धर्मयुग’ में प्रकाशित आपका आत्म चिंतन मंथन,यथार्थ से साक्षात्कार, स्वीकारोक्ति मेरे हृदय में आज भी जीवित है, आपके प्रति मेरे सम्मान की सूचक है। आत्म चिंतन के […]

माँ नहीं पिलाती दूध उस मासूम को, समय-बेसमय जब वह होता है भूखा और रोता है दूध के लिए। माँ नहीं कराती उसे स्तनपान, क्योंकि डर है उसे अपनी देहयष्टि के ख़राब होने का। माँ नहीं पिला सकती दूध, वक्त -बेवक्त उस अबोध को जो नहीं जानता समय का महत्व […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।