जनमंचों पर अपनी साहित्य विधा के हर रंग का जादू बिखेरने वाले हास्य व्यंग्य  कवि .प्रदीप नवीन  यूँ तो जन -जन में लोकप्रिय है उतनी ही उनकी साहित्यिक कर्म में रूचि अम्बर को छू रही है । स्वयं को बड़ा कभी न महसूस समझने वाले प्रदीप नवीन की सहयोग की भावना का एक […]

बेटियाँ शिक्षा के बाद शादी हो कर जाती दूसरे घर में जहाँ पर हर चेहरे/रिश्ते नए माँ जब खाना खाती तब ऐसा लगता बेटी होती तो काम में हाथ बटाती । कभी ऐसा लगता जैसे बेटी ने आवाज दी हो वार -त्योहारों पर आती उसकी यादें माँ की आँखों में […]

ज्योति जैन का ‘यात्राओं का इंद्रधनुष ‘के यात्रावृतांत संग्रह में -कैलाश मानसरोवर ,लेह -लद्धाख ,सिक्किम,केरल,तारकली ,थाईलेंड ,झाबुआ की यात्राओं अनुभवों एवं वहाँ की विषेशताओं का सटीक वर्णन कर पाठकों के दिलों में यात्राओं के प्रति अनुराग भरा और स्वयं ने भी महसूस किया कि यात्राएँ थकाती नहीं बल्कि नई ऊर्जा […]

साहित्यकार ज्योति जैन की ‘जीवन दृष्टी ‘ साहित्य की एक ऐसी खत्म होने की कगार पर खड़ी  ललित निबंध विधा को नई ऊर्जा प्रदान करती है | विभिन्न विषयों चिंतन,विचार और रचनाशील भावों को जमीनी स्तर पर तलाश कर उनमे गहराई से दृष्टि डालकर ‘जीवन दृष्टी ‘ अंक संजोया है | […]

अख़बार वाला रोजाना अख़बार डालता आ रहा है | मगर कुछ दिनों से अख़बार डाल नहीं रहा था | मैने अख़बार वाले की दुकान जाकर कहा – भाई क्या बात है अख़बार नहीं आ रहा है | उसने कहा अंकलजी अख़बार तो रोज डालता हूँ | मैने कहा – दो […]

जब योवन पर आती नदियाँ मछलियाँ तब नदी के प्रवाह के विपरीत प्रवाह पर तेरती छोटी -छोटी धाराओं पर चढ़ जाती सीधे * नदियाँ मिलना चाहती समुद्र से मछलियाँ देखना चाहती नदियों का उद्गम * सागर से मिलती जब नदियाँ लाती साथ में कूड़ा करकट सागर को बताने ऐसे हो […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।