। ले चलो ऐ ‘अश्व’ मुझको उस धरा के छोर, पाप रहित क्षेत्र हो; तम न हो; हो भोर। भ्रमण करता ‘क्षेत्र’ में; गर्दभ-मति लिए हुए, पशु,प्रेत बन भटक रहा अज्ञात; शून्य से परे। देखता हूँ ‘मन की हलचल’ लोचन का प्रकाश ले, कह न ‘बधिर’; सुन सका न-गूँज अन्तर्रात्मा […]

माना कि ‘अंग्रेजी’ की लिपि लिखना बड़ा लुभाता है; ‘गणित’ में जोड़-घटाना उसका महत्त्व समझ में आता है। ‘सामाजिक विज्ञान’ को पढ़कर समझ समाज यह आता है; माना कि ‘इतिहास’ को पढ़कर आँसू भर-भर आता है। ‘रानी’ थी जो लड़-लड़ अपने प्राण न्योछावर कर बैठी; ‘राणा’ दुश्मन काट-मारकर वीरगति को […]

फिराक साहब की पंक्तियां याद आती है *आने वाली नस्लें*  *तुम पर फख्र करेंगी* *जब जब तुम यह जिक्र करोगे* *तुमने नीरज को देखा है* हाँ, मैं उन खुशनसीबों में से हूं जिन्होंने नीरज को रूबरू देखा । पापा जी कवि सम्मेलनों के बहुत शौकीन रहे हैं , भोपाल में […]

पर्वत को तू हिला सकता है; भूतों को तू डरा सकता है; हर दानव को हरा सकता है; जल की बूँदें जला सकता है। तू तो है अनजान, पता न “जीवन कैसे है जीना”; तीन ही सीढ़ी चढ़ा और बोला- खत्म हो गयी सीमा। “बिन पग के न उड़ूँ” सोचते […]

धान रोपने वाले मजदूरों को समर्पित पग दलदल में मन उलझन में कमर बनी कमान वे रोपते धान। रंग बिरंगी पन्नी ओढ़े आते है सब दौड़े-दौड़े बस मेहनत ही भगवान वे रोपते धान !! बिच्छू सांप है संगी-साथी न वृष्टि न धूप सताती न आंधी और तूफान वे रोपते धान […]

 श्यामली आज अचानक अपने बचपन की सहपाठी  टीना से मिलने आयी। डॉक्टर टीना  मरीजों को देख रही थीं । अपने केबिन में श्यामली को बैठा कर पलंग पर लेटी एक बारह वर्षीय बालिका के पास गईं ,जो बहुत ही कमजोर लग रही थी,  शायद खून की कमी होगी । “क्यों […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।