देश के वीर जवानों ने अपनी भारत मां की शान बढ़ायी है । जब-जब बूरी नजर दुश्मनों ने डाली है वीर जवानों ने उनकी अच्छी से बैंड बजायी है। चाहे युद्ध हो या हो वोर्डर बूरा करोगे तो चलेगा बूलडोजर। अब न कोई फिक्र होगा फिजाओं में केसरिया और हरा […]

अंधेरो से दोस्ती कर लो क्योंकि, उजाले तो अब सताने लगे हैं मत करो उजाले की उम्मीद तुम, अंधेरो से दोस्ती कर लो, क्योंकि, अब अपने भी बुजुर्ग आश्रम जाने लगे हैं। जहां होती थी तेज रोशनी अब घूप अंधेरे नजर आने लगे हैं। आशा मत रखना औलाद से, क्योंकि, […]

प्राणों से प्यारा झारखंड है हरा कुदरत की सुन्दरता कूट-कूट कर भरा ऊँचे नीचे खेत टेढे मेढे पगडंडियों से भरा प्राणों से प्यारा झारखंड है हरा। चमक विखेर रहा लाल- लाल पलाश और हरे भरे जंगल ऊँचे लिप्टस और घने काले बादल पहाडियों से भरा प्राणों से प्यारा झारखंड है […]

मैया तेरे चरणों में थोड़ी सी जगह जो मिल जाए सच कहता हूं मेरी मैया जीवन सफल हो जाए कृपा दृष्टि तेरी मैया जिस पर भी हो जाए सच कहता हूं मेरी मैया फिर न कभी वह मन घबराए तेरे दर जो इक बार आ जाए वो न कभी फिर […]

मैं हिन्दी हूँ हिन्दुस्तान हूँ मैं सबकी आवाज हूँ उत्तर ,दक्षिण ,पूरब, पश्चिम की शरहद नहीं मैं कण- कण की पहचान हूँ मैं हिन्दी हूँ हिन्दुस्तान हूँ। है इतिहास निराली अपनी जो कभी न मिटने वाली क्षेत्रवाद की बेड़ियो में मै न जकड़ने वाली राष्ट्र का प्रतीक हूँ कहानियों कविताओ […]

एक कमजोर तिनका तैर रहा था उदंड लहरों के थपेड़ों में । लहरें बार- बार आतीं संपूर्ण वेग से डुबो देना चाहती तिनके को । तैरता हुआ तिनका स्वयं भी समझ न पा रहा था आखिर क्यों वह इन प्रचंड लहरों में डूब नहीं रहा है? लहरों का प्रहार तिनके […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।