यह जीवन पथ है प्रीत मित्र, चख ले इसका नवनीत मित्र। सम्बन्ध-सुरभि से सुरभित हो, महके तेरा हर गीत मित्र। चिंतन..स्वालंबन..संचित कर, युग के अंतस..को..जीत मित्र। भटके न कभी,अटके न कभी, मत कर्मभूमि से रीत मित्र। कुछ रच दे ऐसा कालजयी, सदियां पढ़ जाऐं बीत मित्र॥         […]

नाहक तू शोक मनाय,डरता तू अकारन। आत्मा अजर अमर बंधु,कौन सकता मारन ? जो होता अच्छा होता,मत कर तू संताप। खोखला कर दे मनुवा,भूत का पश्चाताप॥ क्या खो दिया जो लाया,किस बात का विलाप। यहीं लेकर दिया तूने,कर भगवन का जाप॥ मुट्ठी बंद कर आया तू,जाना खाली हाथ। आज तुम्हारे […]

भुखमरी के मेले में एक बार, श्रीमती गरीबी से हुआ साक्षात्कार। मंहगाई के बोझ से झुकी कमर, आँसूओं के पैबंद साड़ी पर। कानों में मजबूरी की बाली, गालों पर विडंबनाओं की लाली। माँथे पर भूख की बिन्दी, लग रही थी जैसे हिन्दी। पीठ से पेट मिला हुआ, दहशत का कँवल […]

यह तो सर्वविदित है कि,पिछली सरकार के १० वर्ष तक हमारे प्रधानमंत्री रोबोट थे। उन्हें रिमोट द्वारा संचालित किया जाता था, लेकिन इस सरकार के गठन से पहले ही वर्तमान प्रधानमंत्री ने लोगों की आस जगाई थी,जिसके फलस्वरूप मोदी जी को प्रचण्ड बहुमत मिल। इसके कारण आधुनिक समर्थक ‘अंधभक्त’ और […]

हे माधव, कहाँ…हो आओ.. हे ..नाथ भूल चुके हैं पार्थ। कर्म ..की ..गीता कर्तव्य..से..रीता धर्म का आवाहन् नहीं ..रहा..पावन। जब…. कि , पाप ..का ..सूरज ..चढ़ा है, जयद्रथ ने चक्रव्यूह गढ़ा है महाभारत की पृष्ठभूमि तैयार है कुरुक्षेत्र.. में ..रण.. हुंकार … है। किन्तु …गांडीवधारी अर्जुन, मोह.. की ..माया ..से […]

हे मुरारी,मदन मोहन फिर नए सपने बुना दो, हैं खड़े अर्जुन भ्रमित,पुरुषार्थ की गीता सुना दो। नींव तक निज संस्कारों की उखड़ती जा रही है, रक्ष संस्कृति की पुन: विष बेल बढ़ती जा रही है। दिग्भ्रमित धरमावलंबी  टोलियों  में बंट गए हैं, ज्ञान  के भंडार  सारे अब धरा पर घट […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।