वो छप्पर जिसके नीचे कभी चार जिन्दगियों का गुजारा हुआ करता था। जो जाड़े की गलन से गर्मी की तपन से बरसात की सीलन से उन्हें बचाता था। खुद धूप, ठंड , बरसात को झेलकर उन्हें सुरक्षित रखता था। छप्पर को सहारा देने वाले दोस्त जैसे थमले, उन पर होने […]

घोर कलयुग है भइये, समय के साथ चलिए कुछ बनों या ना बनों पर कलयुगी बन जाइये।। सारा हुनर कारीगरी, चालाकियां और होशियारी आपका अपना है सब, जब चाहें तब अपनाइये जब दूसरे की बात हो , मासूम सा बन जाइये कुछ बनों या ना बनों पर ,कलयुगी बन जाइये।। […]

मन में विचारों के द्वन्द्व से, प्रतिशोध या प्रतिद्वन्द्व से क्यों हृदय में उछाल है, मेरा ये सवाल है- मेरा ये सवाल है। कोई नहीं मिलता किसी से, हर वक़्त लड़तें हैं सभी से जाती और धर्म के नाम पर, क्यों हो रहा बवाल है मेरा ये सवाल है- मेरा […]

वो विरह वेदना सहती है, फिर भी न वो कुछ कहती है चाहें दिल में हो दर्द भरा, पर सदा प्रेम में बहती है वो सहनशील भी कितनी है,आखिर वो मेरी पत्नी है। जब भी बीमार मैं हो जाता, दादी के नुस्खे बतलाये दो और दो चार नही जोड़े, परिवार […]

हर बात पर यूँ आँसू बहाया नहीं जाता , हर बात सबको दिल का बताया  नहीं जाता । सब घूमते हैं आज साथ में लिए  नमक , हर जख्म दिल का सबको दिखाया नहीं जाता । हो दर्द सही इश्क का ईनाम तो आता, खाली ही सही हाथ में वो […]

लो मिठाइयां खाओ चुनाव आया है, फिर से आया तेरे द्वारे चुनाव आया है । हमने जा करके चरण खूब थे चूमें उनके , पैर पर इनको गिराओ चुनाव आया है। नहीं मिलेगा पांच साल तक ये प्याला फिर , पी लो ये मुफ़्त की दारू चुनाव आया है। भाई […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।