भूख की पीड़ा को सहता गया, कर्म के मर्म को स्पर्श करता गया, मैं  हूँ `किसान`.. अन्नदाता की पदवी को ढोता गया, क्षुधित बेटी को पुचकारता गया, मैं हूँ `किसान`l आधुनिकीरण की बलि चढ़ता गया, जमीन में सीमेंट के जंगल बोता गया, मैं हूँ `किसान`.. दामाद को खरीदता गया, बेटे […]

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एक बार संत हुसैन का ध्यान कुत्ते की तरफ आकृष्ट करते हुए किसी नास्तिक व्यक्ति ने पूछा-‘आप दोनों में श्रेष्ठ कौन है? आप अच्छे हैं या यह कुत्ता अच्छा है?’ संत जानते थे,जिसकी आत्मश्रद्धा कमजोर हो या जो अपने अस्तित्व को स्वीकार न करता हो वह नास्तिक है। जो धर्म […]

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क्योंकि मैं मजदूर हूं, तन से भी और मन से भी बोझा उठाता हूं। क्योंकि मैं मजदूर हूं? खिलाता,खाता कमाकर के निठल्ला कहलाता हूं। क्योंकि मैं मजदूर हूं? हर आते और जाते को ठोंकता सलाम हूं। क्योंकि मैं मजदूर हूं। मजदूरी सभी को खलती, खैरात में पलता हूं। क्योंकि मैं […]

टूटे हुए दिल को फिर से जोड़ने आया हूँ, मैं तुम्हारे दिल में घर अपना बनाने आया हूँ। तुम रुठी रहो मुझसे अनोखे से अंदाज में, मोहब्ब्त भरे अंदाज से तुम्हें मनाने आया हूँ। गई थी तुम,मेरी चाहत की गली छोड़कर, आज अपने दिल में तुम्हें बसाने आया हूँ। ओ […]

ब्रम्हांड है माँ ! अनुभूति प्रथम ! संपूर्ति है माँ ! निःस्वार्थ भाव ! संघर्ष झेलती वो ! है निर्मात्री माँ ! पुनीत भाव ! पवित्र परिभाषा ! पावन है माँ ! #अलका गुप्ता ‘भारती’ परिचय : श्रीमती अलका गुप्ता ‘भारती’ मेरठ (उ.प्र.) में रहती हैं। काव्यरस-सब रस या मिश्रण […]

मंजिल रूठ गई पैरों से, श्रम से दूर सफलता भागी आँखों में आ बैठा मरुथल, पथ को खाने लगीं दिशाएँ कहो मित्र!रोएं या गाएं। आंगन में उग रही उदासी, चौराहों पर खड़े लुटेरे छीन रही हिंसा पगलाई, सारे सपने तेरे-मेरे सम्बन्धों का उपवन उजड़ा, फल स्वार्थ के आक-जवासे छोटा हुआ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।