ये तूफान के पहले की शांति है या आंधी के बाद का सन्नाटा? हकीकत चाहे जो भी हो लेकिन उम्मीद जो तुमने जगाई, उसके बाद सन्नाटे का ये आलम ऐसा लगता है जैसे मंजिल तो मिली पर चैन नहीं, पूछो अपने आपसे कि यहाँ  बैचेन कौन नहीं। जंग समाप्त होने […]

कटघड़े में करें खड़ा, लगा झूठे आरोप जिसे जब बदनाम करें, कौन सकेगा रोक। छुपाना है गर तुम्हें, अपने भौतिक भोग बाबाओं का वेश धर, करें नए प्रयोग। वैधानिक तरीकों से, करें जो गलत काम बच जाते कानून से, नेताओं के नाम। हीरोइन बन ढंक गए, सभी अनैतिक काम गलतियां […]

दोस्त! वादा किया नहीं होता। आज  तेरे,यहां नहीं  होता।। सहता  क्यों दर्द ,रोगी कैंसर का। खैनी  गुटखा ,भखा  नहीं  होता।। रंजिशें घर में,कलह नहीं  बढ़तीं। दारु-आदी,हुआ  नहीं  होता।। हाड़   ढाँचे   में   मांस  भी  होता। खून    स्मैकिया    नहीं    होता।। खांसी बलगम न श्वांस ही भरती। […]

मैंने भी मोहब्बत में ख्वाब देखा था, जिगर को गुलाबी फूलों से तोला था। एक तितली जिंदगी में आई थी, खुशियों के रंग वो साथ लाई थी। हर दिशा रोशन-सी लगती थी, मानो वही असली जिंदगी थी। भोर से साँझ बस वही दिखती थी, हर पल मिलने की चाह उठती […]

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उम्र  यूँ रेत-सी फिसलती रही, लाख बंदिशों के बावजूद  बिखरती रही।   ना मुकाम पाया ,ना मुकाम का कोई निशां, जिन्दगी तो मेरी  राह में  निकलती  रही …l अरमां थे कि ख्वाबों का बनाएँगे आशियाना, जोड़ने लगा मैं तिनके –तिनके,चुन –चुन  के   मगर आँधियाँ मुझसे होकर फिर गुजरती रही।   […]

खर्चों में इजाफा है, तनख्वाह में इजाफा है। हर रोज कम होती जिन्दगी में सुकून खफा सा है, अब कोई भी रिश्ते में जज्बात नहीं बाकी। हर रिश्ता यही पूछे मेरा, क्या मुनाफा है। …….—-  #अमित शुक्ला, बरेली Post Views: 144

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।