हम पर है अधिकार तुम्हारा..

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हम पर है अधिकार तुम्हारा,
मेरे सपनों पर भी अधिकार तुम्हारा
देना अगर मुझे तुम फिर तो लौटा देना वो प्यार हमारा।
मैं सांसें भी लेता हूँ तो तुम्हारी इजाजत लेकर के,
द्वार तुम्हारे आऊंगा बस एक शिकायत लेकर के।
प्यार मोहब्बत का रिश्ता न निभाना तुमको आया,
तुम्हारी इस गलती से सपना न हुआ साकार हमारा।
हम पर है अधिकार तुम्हारा………. ।।
बिना सहारे कठिन राह पर चलता रहा अकेला,
मैंने जो राह चुनी है उस पर है काँटों का मेला।
मेरे साथ चलोगे तुम तो थक के हार जाओगे,
होकर नाराज तोड़ दोगे ये सारा व्यवहार हमारा।
हम पर है अधिकार तुम्हारा……. ।।
मेरे घर-आंगन में सुख की नदियाँ बहती हैं,
डाल पे बैठं चिड़िया भी ढाई अक्षर कहती हैं।
प्यार से बोलो मुझसे सारा न्यौछावर कर देंगे,
बीज नफ़रत के बोकर मत तोड़ो परिवार हमारा
हम पर है अधिकार तुम्हारा…..।।

———–#अमित कैथवार

परिचय : शौकिया लेखक अमित कैथवार उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुर (खीरी )में मितौली ग्राम में रहते हैं।

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।