आपकी नज़र

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girish joshi
तुम जाते जाते चाहत की गर सभी निशानी ले जाते
मन से स्मृतियाँ मिटा सभी आँखों का पानी ले जाते
मन मुँडेरों पर क्यूँ अब तक यादों के दीप जलाये हो
अपने लम्हों की अपने संग हर एक कहानी ले जाते ।
कब माँगे महल दुमहले थे कब माँगी बोलो जागीरी
इस मन की ये अभिलाषा थी दिल की रजधानी ले जाते ।
है कसक तुम्हारी उल्फत की बढ़ जाती और दबाने से
जिस तरह छीना चैंन सुकूं ये टीस पुरानी ले जाते ।
सन्नाटे प्रेम की गलियों में हैं ख़ाली दिल के गाँव यहाँ
बेवस मन के चौबारे से छाई बीरानी ले जाते ।
तुम बिन सजना और सँवरना हर माने में बेमानी है
जब बंध नहीं सम्बंधों के बेकार जवानी ले जाते
हम बुत के मानी ज़िंदा हैं बस आवाजाही साँसों की
किरचों से पहले ख़्वाबों के एहसास रूहानी ले जाते ।
उन बाहों के गठबन्धन सी जब लरजी प्रीत कहीं कोई
घिर आये मंज़र माँजी के ये शाम सुहानी ले जाते ।
तेरे चाहत के तोहफ़े बस ग़म की एक कहानी हैं
जो तुमने कभी दिये”जोशी”वो राजा रानी ले जाते ।
#गिरीश जोशी
भरतपुर (राजस्थान) 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।