जिन्दगी है ऐसी कली।
जो काँटों के बीच पली।
पल्लवों संग झूल झूले,
महकी सुमन बनकर खिली।
जिन्दगी राहें अनजानी।
किसकी रही ये पहचानी।
कहीं पुष्पसज्जित राजपथ,
कहीं पगडण्डियाँ पुरानी।
जिन्दगी सुख का सागर ।
जिन्दगी नेह की गागर।
किसी की आँखों का नूर ,
धन्य विश्वास को पाकर।
जिन्दगी एक अहसास है
भटकी हुई सी प्यास है।
जिन्दगी भूले सुरों का ,
अनुपम सुरीला राग है
जब डगमगाती जिन्दगी
गमगीन होती जिन्दगी
तब हौंसलों के पंख लगा
नभ में उड़ती है जिंदगी ।
कर्म पथ से ही गुजरती।
मंजिलें मुश्किल से मिलती।
जिन्दगी अमानत ईश की
डोर इशारे उसके चलती ।
#पुष्पा शर्मा
परिचय: श्रीमती पुष्पा शर्मा की जन्म तिथि-२४ जुलाई १९४५ एवं जन्म स्थान-कुचामन सिटी (जिला-नागौर,राजस्थान) है। आपका वर्तमान निवास राजस्थान के शहर-अजमेर में है। शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में आप राजस्थान के शिक्षा विभाग से हिन्दी विषय पढ़ाने वाली सेवानिवृत व्याख्याता हैं। फिलहाल सामाजिक क्षेत्र-अन्ध विद्यालय सहित बधिर विद्यालय आदि से जुड़कर कार्यरत हैं। दोहे,मुक्त पद और सामान्य गद्य आप लिखती हैं। आपकी लेखनशीलता का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है।
Mon Jun 4 , 2018
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