माँ

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shveta
विश्व वन्दनीय वात्सल्य मूर्ति साकार,
‘माँ’स्वयं ही है एक परिपूर्ण संसार..
दूर करे जो मन के,सब क्लेश विकार।

‘माँ’ के स्पर्श में छिपा सुकून अपार,
पहाड़-सी विपदा हो जाए बेड़ा पार.
‘माँ’ के आशीष से मिले सब संसार।

चाहे सुख,या दुःख की बहे बयार,
‘माँ’के आँचल में दुआओँ की बहार..
सींचे संतति देकर नित नए संस्कार।

‘माँ’ के ममत्व की महिमा अपरम्पार,
सनातन धरम करे सदा से यही प्रचार..
‘माँ’ को नित नमन वंदन नमस्कार।

प्रेरणा स्रोत बन करती नैय्या पार,
‘माँ’को प्रभु तुल्य कहे ये संसार..
मातृ दिवस मनाना तब हो साकार,
‘माँ’की आँखों में न हो कभी अश्रुधार।

                                                                                 #श्वेता जोशी
परिचय : इंदौर निवासी श्रीमती श्वेता जोशी बीएससी सहित एम.ए.(अंग्रेज़ी साहित्य) और बी.एड.भी किया है।एक वर्ष से आप स्वतंत्र लेखन (मुख्यतःकाव्य) में सक्रिय हैं। गृहिणी के साथ ही वर्तमान में रोटरी अंतरराष्ट्रीय मंडल की मासिक पत्रिका की संपादक का दायित्व भी निभा रही हैं।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।