दहशतगर्दी

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kiran baranval
आये दिन दंगे की खबर सुन आत्मा कांप जाती है। हम किसके लिये  और क्यों आपस में  लड़ कट रहे हैं। काश कोई  मेरे सवाल का जवाब दे देता
ये कैसी दहशतगर्दी है यारों
फैला रहा कौन वैमनस्यता दिशा चारों
जात पात की चल रही क्यो लड़ाई
दुश्मन हो चला एक भाई का दूजा भाई
      राम हमारा रहीम तुम्हारा है
      क्यों नहीं समझते प्यारा देश ये हमारा है
      खून में नहीं है भिन्नता
       विचारों में  क्यों रखे हो विभिन्नता
ईश्वर अल्लाह के नाम पर क्यों लड़े जा रहे हो
मार काट कर क्यों  बेमौत मरे जा रहे हो
सबका है ये दुलारा चमन
पाले हो आपस में  बैर,भला आयेगा कैसे  अमन
   माँ कहो या अम्मी,भारत  हमारा है
   पूर्वजों ने खून की कीमत पर इन्हे संवारा है
आज़ादी के रण में ना जाने कितनों  ने गोली खाई है
जान की कीमत पर  हमें स्वतंत्रता दिलवाई है
   ना रहीम के ना राम के, रक्त बहाई हिन्दूस्तान के नाम के
   ना मुहर्रम मनाना था ना दिवाली मनानी थी
    ज़िद था उनका, बस हमें  आजादी पानी थी
उनके कुर्बानी को ना व्यर्थ करो
आपस में अल्लाह ईश्वर के नाम ना लडो।
#किरण बरनवाल

Arpan Jain

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।