rituraj
हम ना थे वैसे जैसे
तुमने हमें बना दिया .
वेदों के मूल तथ्यों को भी
जड़ से पूरा मिटा दिया .
वेद जला मूल इतिहास जला
सारी रचना में मनगढ़ंत जोड़ दिया.
अथर्ववेद जो आयुर्वेद थी
उसे जादू टोना से जोड़ दिया .
कृष्ण नहीं थे राधा से सम्बंधित
उनको कैसे चरित्रहीन बता दिया.
कृष्ण थे योग पुरुष और एक ही पत्नी
जाने कितने कुचरित्रो मे उलझा दिया .
सनातन में नहीं था मूर्ति पूजा
तुमने मूर्ति पूजा कहा से जोड़ दिया.
सनातन के रीढ़ और पालक ब्राह्मण
तुमने अपनों के बिच कितना बदनाम.
जीवन जीने का तरीका सनातन
तुमने धार्मिकता में मोड़ दिया .
३३ कोटि थे गुरु और देव
तुमने उसे ३३ करोड़ में बदल दिया.
भारत की थी अपनी संस्कृति
इंग्लिश और हिन्दुस्तानी में घोल दिया .
मूल भाषाओ की क्या थी कसूर
उन लिपि और भाषा को बंद करा दिया.
भारत में ना था बड़े छोटे का भेद
कर्म रूपी थी सनातनी समाज .
जब से तुम लोग भारत का रुख किया
पूरी सनातनी को एक दुसरे से लड़ा दिया.
प्रिंस रितुराज दुबे
आसनसोल (वेस्ट बंगाल)

About the author

(Visited 1 times, 1 visits today)
Please follow and like us:
0
Custom Text