पन्नों पर लिखने से पहले

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kumari archana
पन्नों पर  लिखने से पहले,
कविता मानस पटल लिखूँ।
क्यों तन-मन में यह टूटन है,
चटका मेरा भी दर्पण है
क्यों जाते वो भूल व्यथा को,
उपचार ‘अर्चना’,चिंतन है।
घावों पर मलहम हो जाए,
ऐसा अब नवनीत करुं।
पन्नों पर लिखने से पहले,
कविता मानस पटल लिखूं॥
देखो भू पर कूड़ा-कचरा,
दुर्गंधित है,जो यह बिखरा
अपना दोष दूसरे को मत,
देकर,पथ कर दे जो निखरा
हर कोई मुस्काए फिर तो,
ऐसा मैं मनजीत करुं।
पन्नों पर लिखने से पहले,
कविता मानस पटल लिखूँ॥
दूजे की पीड़ा को हरकर,
निर्झर-सा तू भी अब झर-झर
मैं मुस्काऊँ,तू मुस्काए,
हम दोनों ही झोली भरकर
हम भी महकें,तुम भी चहको
ऐसी मनहर प्रीत भरुं।
शब्दों को अर्थों के पख दे,
नए-नवेले गीत रचूं॥

           #कुमारी अर्चना

परिचय: कुमारी अर्चना वर्तमान में राजनीतिक शास्त्र में शोधार्थी है। साथ ही लेखन जारी है यानि विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में निरंतर लिखती हैं। आप बिहार के जिला-पूर्णियाँ ( हरिश्चन्द्रपुर) की निवासी हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।