भारत मां सब कुछ

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rakesh chaturvedi
दाग सीने में गोलियां,सब सहन कर सकता हूँ,
भारत माँ का बेटा हूँ,सब सहन कर सकता हूँl

भारत माँ सब कुछ है मेरी,दुश्मन मिटाने निकला हूँ,
सोना पड़े भले बर्फ में,सब सहन कर सकता हूँl

भारत माँ का बेटा हूँ,निकल पड़ा अकेला हूँ,
माँ का आशीर्वाद है,सब सहन कर सकता हूँl

तिरंगा मेरी जान है,बस उसे बचाने निकला हूँ,
आग में भले चलना पड़े,सब सहन कर सकता हूँl

सोने की इस धरती में,भारत माँ का नाम है,
चाँद-तारे गवाह हैं,सब सहन कर सकता हूँl

दिव्यांग हो के भी मैं,हिमालय चढ़ सकता हूँ,
भारत माँ पर भरोसा है,सब सहन कर सकता हूँl

जब तक रहेगी आखिरी सांस माँ,राकेश की,
सरहद में जख्म हो के भी,सब सहन कर सकता हूँl

#राकेश कुमार चतुर्वेदी

परिचय : राकेश कुमार चतुर्वेदी की जन्मतिथि-२० फरवरी १९९६ तथा जन्म स्थान-जमनीडीह हैl आपका वर्तमान निवास छत्तीसगढ़ के महासमुंद स्थित जमनीडीह में ही हैl छत्तीसगढ़ राज्य के शहर भवरपुर निवासी श्री चतुर्वेदी अभी स्नातक में अध्ययनरत हैंl लेखन विधा-ग़ज़ल,गीत तथा हाइकु हैl आपके लेखन का उद्देश्य-समाज को जागरूक करना हैl

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।