नेता जी,सुन लो..

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sulaxana

नेता जी मेरी भी छोटी-सी विनती सुन लो।
एमएलए की सीट के लिए मुझे चुन लो॥

जीतने के बाद जैसे तुम कहोगे नेता जी,
वैसा ही काम मैं कर दूंगा सरेआम।
जनता की खून पसीने की कमाई
छीन-छीनकर आपका घर भर दूंगा सरेआम।
उफ़्फ़ नहीं करूँगा चाहे चूस खून लो,
एमएलए की सीट के लिए…॥

रोज नए-नए घोटाले करूँगा आपकी दया से,
और पैसे सारे मैं विदेशों में भेज दूंगा।
सरकार की पड़ी हैं खाली ज़मीनें जितनी,
बनकर दलाल सस्ते दामों में बेच दूंगा।
नेता जी बस ये एमएलए वाला ताना बुन लो,
एमएलए की सीट के लिए…॥

झूठ बोलने में तो मेरा कोई मुकाबला नहीं,
झूठे वादों की तो नेता जी मैं रेल चला दूंगा।
बिना पैसे लिए नौकरी नहीं दूंगा नेता जी,
इंटरव्यू में फर्जीवाड़े का खेल चला दूंगा।
नेता जी एक बार सुन मेरे सारे गुण लो।
एमएलए की सीट के लिए…॥

नेता जी आपकी पार्टी के लिए चंदा दूंगा,
बस एक बार मुझ पर भी दया दृष्टि कर दो।
एमएलए की सीट के लिए उम्मीदवार घोषित करके
‘सुलक्षणा’ को ‘विजयी भव’ बस ऐसा वर दो।
जीत की पार्टी कुल्लू-मनाली या देहरादून लो,
एमएलए की सीट के लिए मुझे चुन लो॥

#डॉ.सुलक्षणा अहलावत

परिचय : डॉ.सुलक्षणा अहलावत की जन्म तिथि १८ नवम्बर १९८१ हैl पैतृक गाँव बहलम्बा(जिला रोहतक-राज्य हरियाणा) निवासी डॉ.अहलावत के साहित्यिक गुरु रणबीरसिंह बड़वासनी (सुप्रसिद्ध हरियाणवी रागनी गायक) हैंl आपकी शिक्षा-बी.एड.,एम.ए.(शिक्षा,अंग्रेजी),एम.फिल.(अंग्रेजी) और पी.एच-डी.(अंग्रेजी) हैl बतौर अतिथि प्रवक्ता-अंग्रेजी (शिक्षा विभाग-हरियाणा सरकार) रहने के बाद अब स्थाई रुप से कार्यरत हैं।  शिक्षा के क्षेत्र में आपकी उपलब्धि देखें तो अंग्रेजी विषय में आपकी छात्राओं ने बोर्ड की १२ वीं की परीक्षा में १०० में से १०० अंक प्राप्त किए,  ऐसे ही  शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े हुए मेवात (हरियाणा) का आपकी मेहनत से अंग्रेजी विषय का परिणाम श्रेष्ठ रहने के साथ ही सत्र २०१६-१७ में कक्षा १२ वीं में राजनीति शास्त्र का परीक्षा परिणाम १०० प्रतिशत रहा है।सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय गतिविधि के रुप में कलम के माध्यम से महिलाओं के मुद्दों को उठाना,पौधारोपण करना,भ्रूण हत्या के विरुद्ध लोगों को जागरूक करना, बेटियों की शिक्षा के लिए प्रयास करना और कैंसर पीड़ित बच्ची के इलाज हेतु धनराशि एकत्रित करना आदि प्रमुख हैं। सामाजिक संस्थाओं से जुड़ाव के अंतर्गत आप एक गैर सरकारी संगठन की संस्थापक होने के साथ ही एक मंच की महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्ष और साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं। पठन-पाठन,लेखन और सामाजिक कार्य में आपकी काफी रुचि है। फरवरी २०१४ से हरियाणवी एवं हिंदी भाषा में लिख रही हैं। आपको हरियाणवी रागनी, कविता,ग़ज़ल,शायरी,लेख एवं हाइकू विधा में लिखना भाता है,परंतु हरियाणवी रागनी लिखना सर्वाधिक पसंद है। सामाजिक विषयों पर लिखना आपको आनंद देता है।सम्मान में आपके खाते में शिक्षा दीक्षा शिरोमणि सम्मान-२०१६, हरियाणवी लेखन के लिए हरियाणा सरकार द्वारा सम्मान और उन्नत हरियाणा सम्मान है। साथ ही आपको ‘काव्य मर्मज्ञ सम्मान’,’साहित्य-सोम’ और प्रशस्ति-पत्र सहित करीब ३० अन्य सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है। आपकी रचनाएँ हरियाणा सहित उत्तर प्रदेश,गुजरात,भोपाल और राजस्थान आदि के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।
आपकी रचनाओं को वेबसाइट्स और ब्लॉग्स पर भी स्थान मिला है।
‘मेरे बोल मेरी पहचान’ (हिंदी कविता संग्रह)की ई-बुक प्रकाशित हो चुकी है। विशेष रुप से पांचवे दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी रचना प्रकाशित हो चुकी है। डॉ. अहलावत का निवास चरखी दादरी स्थित प्रेम नगर में है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।