लिख सके हैं ग़ज़ल

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rajkumar shukl
शब्द-शब्द जोड़कर लिख सके हैं इक ग़ज़ल,
भावना निचोड़कर लिख सके हैं इक ग़ज़ल।
चैन भी सुकून भी नींद भी आराम भी,
सब सुखों को छोड़कर लिख सके हैं इक ग़ज़ल।
कल्पना के पंख लगा उड़ के पहुँचे अर्श तक,
तारे तोड़-तोड़कर लिख सके हैं इक ग़ज़ल।
वो पुरानी सिर पे लदी बोझ से झुकातीं हुईं,
रूढ़ियाँ मरोड़कर लिख सके हैं इक ग़ज़ल।
जुल्मों-सितम से भरी हुई मिली जो गागरी,
उसको फोड़-फोड़कर लिख सके हैं इक ग़ज़ल।
दूर भागती हुई हकीकतों को ‘राज’ हम,
दम से मोड़-मोड़कर लिख सके हैं इक गजल॥

#राज कुमार शुक्ल ‘राज’

परिचय: राज कुमार शुक्ल ‘राज’ की रचनाएं कई पत्रों और साहित्यक पत्रिका में गजल एवं कविता के रुप में छपी हैं। सम्मान के रुप में औरैया में न्यास द्वारा सर्वश्रेष्ठ गजलकार सम्मान २००० में तथा स्मृति संस्थान द्वारा २००१ सहित नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित शारदोत्सव प्रदर्शनी में प्रति वर्ष सम्मानित होते रहे हैं। अखिल भारतीय पुस्तक प्रचार समिति ने भी आपको २००७ में सम्मानित किया है। इसके अलावा मुक्तक मंथन सम्मान,प्रतिक्रिया श्री सम्मान,मुक्तक गौरव सम्मान,सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान तथा दीपशिखा सम्मान के साथ ही काव्य सागर सम्मान भी मिला है। आप सोशल मीडिया में सक्रिय होकर कई समूहों के संस्थापक संचालक हैं। श्री शुक्ल की जन्मतिथि-२५ जून और  जन्म स्थान -औरैया है। वर्तमान में औरैया में सत्तेश्वर मुहाल साहित्य भारती पुस्तकालय के पास (उत्तर प्रदेश) हैं। बी.ए. शिक्षित श्री शुक्ल का कार्यक्षत्र-सामाजिक क्षेत्र-औरैया ही है। लेखन विधा -ग़ज़ल और गीत है। आपके लेखन का उद्देश्य-हिंदी का सम्मान बढ़ाना है। 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।