जान बची-लाखों पाए

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gopal
सुबह-सुबह चूहा,
सेंक रहा था धूप।
बिल्ली मौसी ओढ़,
कर कंबल बैठी थी चुप॥
कुत्ता तान रहा था,
अपनी टेढ़ी पूंछ।
देखकर बिल्ली मौसी,
ने लगाई दौड़ खूब॥
चूहे ने खैर मनाई
जीभर के खाई गुपचुप।
मौसी और कुत्ते के बैर
से चूहा नाचा होकर खुश॥

                                           #गोपाल कौशल

परिचय : गोपाल कौशल नागदा जिला धार (मध्यप्रदेश) में रहते हैं और रोज एक नई कविता लिखने की आदत बना रखी है।

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