फुकरे वाली बात नहीं रिटर्न्स में

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‘फुकरे रिटर्न्स’ के निर्देशक- मृगपालसिंह लाम्बा हैं तो निर्माता रितेश सिधवानी,
फरहान अख्तर हैं। कलाकारों में ऋचा चड्ढा,पुलकित सम्राट, वरूण शर्मा,प्रिया आनन्द, अली फैज़ल,पंकज त्रिपाठी और विशाखा ने अभिनय किया है। २ घण्टे १५ मिनट की इस फिल्म की कहानी पिछली फिल्म से ही शुरू की गई है। भोली पंजाबन (ऋचा) को जेल हो चुकी है,वह जेल से एक नेता से साठगाँठ करके बाहर आने में कामयाब हो गई है। अब उसके दो ही उद्देश्य हैं -फुकरे गैंग से बदला लेना और पैसा कमाना।

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इधर चूचा (वरूण शर्मा) का सपने देखना जारी है,और हनी (पुलकित) का उन्हें जोड़ना। इसमें और भोली के बदला लेने में कई जगह हास्य पैदा होता है। चूचा के सपनों को अमेरिकन फ़िल्म ‘डेज़ा वू’ से जोड़ के चूचा वू बनाया गया है। ‘डेज़ा वू’ में भविष्य में होने वाली घटना कुछ समय पूर्व ही पात्र को दिख जाती है,ठीक वैसे ही चूचा वू को सपने दिखते हैं-अब फुकरे गैंग और  भोली मिलकर पैसा कमाना चाहते हैं। फ़िल्म में इसी के चलते अच्छा हास्य पैदा हुआ है। पहला अंतराल तेज,लेकिन दूसरा पहले के मुकाबले थोड़ा सुस्त लगा है। अदाकारी की बात करें तो ऋचा के साथ ही पुलकित ने भी शानदार किरदार पकड़े हैं।          वरूण शर्मा और मनजोत भी कामयाब रहे हैं। वरूण की मासूमियत के साथ शातिराना अंदाज आपको हंसने पर मजबूर कर देगा। पंकज त्रिपाठी लाजवाब से भी ऊपर है। अब अंत में क्या फुकरे रईस बन पाते हैं,क्या चूचा अपने प्यार को पा पाता है,या फुकरे फिर किसी मुसीबत में पड़ जाते हैं…? इसके लिए आपको फ़िल्म देखनी पड़ेगी। इस फ़िल्म को १२०० सिनेमा  मिले हैं। बजट ८ करोड़ तथा  प्रमोशन मार्केटिंग मिलाकर कुल ३० करोड़ का खर्च हुआ है। इस फ़िल्म के साथ ३ फिल्म और भी प्रदर्शित हुई है। ‘सल्लू की शादी’, ‘द ग्रेट लीडर’ और ‘गेम ओवर’ है,पर लेकिन तीनो फिल्म न्यूनतम बजट है। पिछले हफ्ते भी कोई खास फ़िल्म नहीं थी,इसलिए यह फ़िल्म बजट निकाल लेगी। फिर भी इस दूसरी फ़िल्म से पहली फुकरे की उम्मीद लेकर न जाएँ, पर फ़िल्म हँसाने में कामयाब है।

                                             #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।