सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ

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kailash
शिक्षक हूँ,कई मुसीबतों से लड़ता हूँ,
बच्चों के सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ।
लेकर आए हैं बच्चे,मेरे पास कुछ आशा,
जानते नहीं अपने,भावी जीवन की भाषा
उनकी मूक भाषा को,समझता हूँ,पढ़ता हूँ,
बच्चों के सुनहरे,सपनों को गढ़ता हूँ।
शिक्षक हूँ….॥
मूल कर्म करने से,कई बार रोका जाता है,
गैर शैक्षणिक कार्यों में,मुझे झोंका जाता है
अपनी समस्याएँ,नहीं किसी के सिर मढ़ता हूँ,
बच्चों के सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ।
शिक्षक हूँ….॥
कुछ पालक भी शिक्षा का महत्व जानते  नहीं,
अपने बालक का ही भविष्य  पहचानते नहीं
उनको भी समझाने,घर -घर की सीढ़ियाँ चढ़ता हूँ,
बच्चों के सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ।
शिक्षक हूँ….॥
आधुनिक ज्ञान से भी,साक्षात्कार करता हूँ,
प्रशिक्षण,स्वाध्याय से नित नवाचार करता हूँ
बाधाओं के बीच नित्य आगे बढ़ता हूँ।
बच्चों के सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ॥
                                       #कैलाश भावसार
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