सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ

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kailash
शिक्षक हूँ,कई मुसीबतों से लड़ता हूँ,
बच्चों के सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ।
लेकर आए हैं बच्चे,मेरे पास कुछ आशा,
जानते नहीं अपने,भावी जीवन की भाषा
उनकी मूक भाषा को,समझता हूँ,पढ़ता हूँ,
बच्चों के सुनहरे,सपनों को गढ़ता हूँ।
शिक्षक हूँ….॥
मूल कर्म करने से,कई बार रोका जाता है,
गैर शैक्षणिक कार्यों में,मुझे झोंका जाता है
अपनी समस्याएँ,नहीं किसी के सिर मढ़ता हूँ,
बच्चों के सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ।
शिक्षक हूँ….॥
कुछ पालक भी शिक्षा का महत्व जानते  नहीं,
अपने बालक का ही भविष्य  पहचानते नहीं
उनको भी समझाने,घर -घर की सीढ़ियाँ चढ़ता हूँ,
बच्चों के सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ।
शिक्षक हूँ….॥
आधुनिक ज्ञान से भी,साक्षात्कार करता हूँ,
प्रशिक्षण,स्वाध्याय से नित नवाचार करता हूँ
बाधाओं के बीच नित्य आगे बढ़ता हूँ।
बच्चों के सुनहरे सपनों को गढ़ता हूँ॥
                                       #कैलाश भावसार

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।