अभी बाकी है…

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anand pathak
हौंसलों में मेरी उड़ान अभी बाकी है,
अभी टूटा नहीं हूँ,जान अभी बाकी है।
रुठकर क्यों गया,आजा ये मेरा आखिर है,
तुझे मनाने का अरमान अभी बाकी है।
वहां तो बनने लगे शीशमहल अब सबके,
गांव में अपना एक मकान अभी बाकी है।
बेचने के लिए अब तो शहर में कुछ न बचा,
तू न कर फिक्र,ये नादान अभी बाकी है।
दर्द अब ख़त्म हुआ,चोंट मेरी ठीक हुई,
एक नए ज़ख़्म का अरमान अभी बाकी है।
तबाह करने को जब जी में हो,चले आना,
हुस्न का तेरे कदरदान अभी बाकी है।
कितनी आसानी से ये खत्म कहानी की है,
मेरे दिल पे तेेेरा एहसान अभी बाकी है।
जब कभी सोचेगा हमको,तो तू भी रो देगा,
हमारे चेहरे पे मुस्कान अभी बाकी है।
चुप रहूं कुछ न कहूँ,ये तो हो नहीं सकता,
हमारे मुंह मे ये जुबान अभी बाकी है।
ओढ़ाई चादर एक गरीब को,तो ऐसा लगा
मेरे अंदर भी इक इंसान अभी बाकी है॥
                                                          #आनंद कुमार पाठक
परिचय: आनंद कुमार पाठक का निवास शहर बरेली के शास्त्री नगर(इज़्ज़त नगर) में है। आपकी जन्मतिथि-४ फरवरी १९८८ तथा जन्म स्थान-बरेली(उत्तर प्रदेश)है। एम.बी.ए. सहित एम.ए.(अर्थशास्त्र) की शिक्षा ली है। नौकरी आपका कार्यक्षेत्र है। आपकॊ पढ़ाई में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक मिलना बड़ी उपलब्धि है। लेखन का उद्देश्य-साहित्य में विशेष रुचि होना है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।