शब्द….

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solanki

शब्दों का नहीं होता कोई
आकार या प्रकार,
फिर भी शब्द चुभते हैं।

शब्दों का नहीं होता है
कोई वजन,
फिर भी शब्द चोट करते हैं।

शब्दों में नहीं होती है
ज्वलनशीलता,
फिर भी शब्द जलाते हैं।

शब्दों में नहीं होते हैं
दवा के गुण,
फिर भी शब्द मन के घाव भरते हैं।

शब्दों में नहीं होती है
कोई गर्माहट,
फिर भी,कठोर मन पिघला देते हैं।

शब्दों में नहीं होते हैं
ताकत के गुण,
फिर भी शब्द साहस देते हैं।

शब्द कर दें दुर्बल-शब्द
कर दें सबल,
क्योंकि,इनके पीछे छुपे होते हैं भाव।

अतः तौल-मोल के बोलिए,
शब्दों से न खेलिए।

                                                                          #शिल्पा सोलंकी

परिचय : बतौर उप-अभियंता (ग्रामीण विकास विभाग) शिल्पा सोलंकी मध्यप्रदेश के झाबुआ में ही  कार्यरत हैं। यह 2010 से सोशल मीडिया में अपनी कविताओं के ज़रिए सक्रिय उपस्थिति बनाए हुए हैं तथा  अंग्रेजी के साथ ही हिन्दी में भी लेखन करती हैं।

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।