प्रथम प्रेम का अहसास

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rajeshwari
अपलक-सी देख रही थी,
और अंतस मन में
महसूस कर रह थी वो,
अनछुए स्पर्श को।
अनजानी-सी सिहरन,
रोम-रोम में घुलती
जा रही थी,फिजा में
फैली वो मादक गंध,
मदहोश किए जा रही थी।
दूधिया चांदनी में ओस से,
भीगी सरसराती हवा में
साड़ी के पल्लू को थामे,
उन अजनबी आँखों में
डूबती जा रही थी।
प्रथम प्रणय निवेदन,
किसने किसको किया
वो सब गौण-सा रहा,
और कब परस्पर दो
आत्माओं का बिन छुए,
अंगीकार होकर खुशबू की तरह
फिजा में मुखरित होकर,
स्मित-सी मुस्कान लरजते
होंठों पर बिखेर गया।
पहले प्यार का पवित्र,
अहसास मंदिर में
बजती घंटियों-सा,
कानों में मधुर-सी
स्वर लहरी-सी बिखेर गया॥

                                                   #श्रीमती राजेश्वरी जोशी

परिचय : श्रीमती राजेश्वरी जोशी का निवास अजमेर (राजस्थान) में है। आप लेखन में मन के भावों को अधिक उकेरती हैं,और तनुश्री नाम से लिखती हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।