मंद-मंद मुस्काती हिन्दी

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kartikey
हिन्दी नारी की बिंदी है,
उससे अंगार निकलने दो
ये मन-से करुणा है हिन्दी,
जन-जन का सपना है हिन्दी।
भावों की तूलिका है हिन्दी,
बिटिया की लोरी है हिन्दी
माँ-सी आहट है हिन्दी,
फौजी की भाषा है हिन्दी।
हिन्दी जीवन का गहना है,
बस ये ही तुमसे कहना है,
अब बारी है अपनेपन की,
कुछ तेरे-मेरे कहने की।
इसमें एक रंग उतरने दो,
जो सुर्ख हुआ था खून कभी
उसमें-भी जीवन भरने दो,
हिन्दी है तुलसी आँगन की।
जो जेठ में लगती सावन-सी,
इसको गंगा-सी बहने दो
अपने मन की-भी कहने दो,
हो शीर्ष-शिखर हिमालय-सी
उसको भी आसमां छूने दो।
न मन में कोई दुविधा हो ,
बस, प्रेम-प्यार की भाषा हो,
बस, कालजयी हो यह हिन्दी ,
इसे मंद-मंद मुस्काने दो॥

                                                              #कार्तिकेय त्रिपाठी

परिचय : कार्तिकेय त्रिपाठी इंदौर(म.प्र.) में गांधीनगर में बसे हुए हैं।१९६५ में जन्मे कार्तिकेय जी कई वर्षों से पत्र-पत्रिकाओं में काव्य लेखन,खेल लेख,व्यंग्य सहित लघुकथा लिखते रहे हैं। रचनाओं के प्रकाशन सहित कविताओं का आकाशवाणी पर प्रसारण भी हुआ है। आपकी संप्रति शास.विद्यालय में शिक्षक पद पर है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।