आक्रोश

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ranu dhanoriya
सीने में अपने आग लिए आक्रोश जगाने आई हूं।
एक दुष्ट पापी की मैं करतूत बताने आई हूं॥
ये अपनी सत्ता चलवाने नोटों पे नोट बिछाते हैं।
आपस में सबको लड़वाने मजहब का नाम उठाते हैं॥
पैसों पे छूट जाते नेता, गरीबों के लिए बस फांसी है।
वकील करे तो करे दलाली, जज साहब भी राजी है॥
आग उगलने आई हूं मेरा भी यही सवाल है।
तू किस मिट्टी में पला बढ़ा,तू किस मिट्टी का लाल है॥
जो नजर उठेगी सरहद पर तो राख बनाकर धर देंगे।
तेरी आंखों में बकरे की हम आंख लगाकर धर देंगे।
ऐसों को फांसी चढ़वाने सत्ता पीछे हट जाती है।
सजा नहीं मिलती तो भारत मां की छाती फट जाती है॥
नमक देश का खाकर, देश को आंख दिखाते हैं।
जुबां काट दो उनकी, जो राष्ट्रगीत न गाते हैं॥
बचपन में वो हाथ में झण्डा लेकर घूमा करता था।
भारत माता के चरणों को निशदिन चूमा करता था॥
आज बड़ा हो करके वो बड़ी पार्टी का नेता है।
कल तक जिन हाथों में झंडा था,उनसे ही रिश्वत लेता है॥
जगह-जगह बिकते कोठे और बार दिखाई देते हैं।
व्यापमं में रिश्वत लेते कई गद्दार दिखाई देते हैं॥
हर शमां को हम भभकती आग बनाकर रख देंगे।
रिश्वतखोरों के मुंह पर काला दाग बनाकर धर देंगे॥
धिक्कार, के ऐसे मक्कारी-बेईमानी कर आते हैं।
हाथ मिलाकर दुश्मन से,कुत्ते की मौत मर जाते हैं॥
पकड़ लिया जो आतंकी को, ऐसा सबक सिखाएंगे।
सबके माथे पर हिन्दुस्तानी तिरंगा झंडा बनाएंगे॥
शरम नहीं आती इनको,मां-बाप की नाक कटाते हैं।
जुबां काट दो उनकी, जो राष्ट्रगीत न गाते हैं॥
इक बात समझ न आई थी,मैंने आवाज़ उठाई है।
इस मिट्टी के लाल सभी,क्यों लड़ते भाई-भाई है॥
जब हिन्दू मस्जिद में जाकर अल्लाह को पूज आते हैं।
क्यों मंदिर और जवारों पर मुस्लिम न सिर झुकाते हैं॥
अब्दुल कलाम भी मुस्लिम थे, खुद को राष्ट्र में ढाल लिया।
यूं ही नहीं देश ने उनको ‘मिसाइल मेन’ का नाम दिया॥
हम हिन्दू हैं-हम मुसलमान, कब तक तुम चिल्लाओगे।
अरे मरने के बाद क्या मज़हब को अपने साथ ले जाओगे॥
देशद्रोहियों के माथे पर दाग दिखाई
देते हैं।
मुझे तो भारत मां को डसते ये सांप दिखाई देते हैं॥
जो सीमा में घुसपैठ करी तो, ऐसी खाल पटाएंगे।
पाकिस्तानी सारे भारत मां की जय चिल्लाएंगे॥
देश निकाला दो उनको, जो देशद्रोही बन जाते हैं।
जुबां काट दो उनकी, जो राष्ट्रगीत न गाते हैं॥
                                                                   #रानू धनौरिया
परिचय : रानू धनौरिया की पहचान युवा कवियित्री की बन रही है। १९९७ में जन्मीं रानू का जन्मस्थान-नरसिंहपुर (राज्य-मध्यप्रदेश)है। इसी शहर-नरसिंहपुर में रहने वाली रानू ने जी.एन.एम. और बी.ए. की शिक्षा प्राप्त की है। आपका कार्यक्षेत्र-नरसिंहपुर है तो सामाजिक क्षेत्र में राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़ी हुई है। आपका लेखन वीर और ओज रस में हिन्दी में ही जारी है। आपकॊ नवोदित कवियित्री का सम्मान मिला है। लेखन का उद्देश्य- साहित्य में रुचि है।
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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।