चीनी नीयत में खोट

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 netrapal
यह देख रहा है आंख फाड़ इसकी नीयत में खोट लगे,
सन बासठ वाली भूले याद उन यादों को भी चोट लगे।
जब हिन्दी चीनी भाई थे हमने सर्वस्व था सौंप दिया,
तू निकला क्रूर घमंडी तूने छुरा पीठ में घोंप दिया।
इस विस्तारवाद की नीति से न चीन कभी तू संभलेगा,
बूढ़ी सेना की टोली से कैसे तू जंग जीत लेगा।
अपने नेताओं को सलाह देते हुए..
हे चोटी के नेता हो सतर्क वरना चोटी बंट जाएगी,
तुम सोते रहना आंख बंद, हिम की चोटी कट जाएगी।
                                                                      #नेत्रपाल राघव
परिचय : नेत्रपाल राघव सामाजिक दिक्कतों पर अधिक लिखते हैं। इनका निवास जहांगीरपुर मांट मथुरा वृन्दावन में है। वर्तमान में हिन्दी भाषा में स्नातक की पढ़ाई जारी है। किसान के बेटे नेत्रपाल वीर व करुण रस में कविता रचते हैं। लेखन के लिए वाराणसी से दो बार सम्मान मिला है। कुछ सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।